23 अक्टूबर 2026 को मेलबर्न का पंचांग

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (20:06 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (02:33, 24 अक्टू॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:24 पर और सूर्यास्त 19:45 पर है। राहुकाल 11:24 से 13:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:24 – 19:45
रात 06:23 तक
तिथि
द्वादशी, 20:06 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 02:33 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 20:06 तक
शुक्ल त्रयोदशी 19:07, 24 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 02:33, 24 अक्टू॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 02:02, 25 अक्टू॰ तक
योग
ध्रुव 03:38, 24 अक्टू॰ तक
व्याघातअशुभ 01:31, 25 अक्टू॰ तक
करण
बव 08:18 तक
बालव 20:06 तक
कौलव 07:42, 24 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 20:34 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:24
सूर्यास्त
19:45
चंद्रोदय
16:37
चंद्रास्त
04:32
दिनमान
13h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:59 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
11:24 – 13:04
यमगंड
16:24 – 18:05
गुलिक काल
08:04 – 09:44

23 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:24 – 08:04सामान्य
लाभ08:04 – 09:44शुभ
अमृत09:44 – 11:24शुभ
काल11:24 – 13:04टालें
शुभ13:04 – 14:44शुभ
रोग14:44 – 16:24टालें
उद्वेग16:24 – 18:05टालें
चर18:05 – 19:45सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:45 – 21:04टालें
काल21:04 – 22:24टालें
लाभ22:24 – 23:44शुभ
उद्वेग23:44 – 01:04टालें
शुभ01:04 – 02:23शुभ
अमृत02:23 – 03:43शुभ
चर03:43 – 05:03सामान्य
रोग05:03 – 06:23टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2407:31दिन
बुध07:3108:38दिन
चंद्र08:3809:44दिन
शनि09:4410:51दिन
गुरु10:5111:58दिन
मंगल11:5813:04दिन
सूर्य13:0414:11दिन
शुक्र14:1115:18दिन
बुध15:1816:24दिन
चंद्र16:2417:31दिन
शनि17:3118:38दिन
गुरु18:3819:45दिन
मंगल19:4520:38रात
सूर्य20:3821:31रात
शुक्र21:3122:24रात
बुध22:2423:17रात
चंद्र23:1700:11रात
शनि00:1101:04रात
गुरु01:0401:57रात
मंगल01:5702:50रात
सूर्य02:5003:43रात
शुक्र03:4304:36रात
बुध04:3605:30रात
चंद्र05:3006:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2315° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।