16 सितंबर 2027 को मेलबर्न का पंचांग

गुरुवार, 16 सितंबर 2027, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

गुरुवार, 16 सितंबर 2027 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (09:03 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (18:14 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:20 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 13:44 से 15:13 तक है।

दिन और रात
दिन 06:20 – 18:11
रात 06:18 तक
तिथि
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 18:14 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 सितंबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
पूर्णिमा 09:03 तक
कृष्ण प्रतिपदा 10:22, 17 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 19:59, 17 सित॰ तक
योग
शूलअशुभ 14:00 तक
गंडअशुभ 13:57, 17 सित॰ तक
करण
बव 09:03 तक
बालव 21:46 तक
कौलव 10:22, 17 सित॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 11:43 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:20
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
18:34
चंद्रास्त
06:05
दिनमान
11h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
13:44 – 15:13
यमगंड
06:20 – 07:48
गुलिक काल
09:17 – 10:46

16 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:20 – 07:48शुभ
रोग07:48 – 09:17टालें
उद्वेग09:17 – 10:46टालें
चर10:46 – 12:15सामान्य
लाभ12:15 – 13:44शुभ
अमृत13:44 – 15:13शुभ
काल15:13 – 16:42टालें
शुभ16:42 – 18:11शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:11 – 19:41शुभ
चर19:41 – 21:12सामान्य
रोग21:12 – 22:43टालें
काल22:43 – 00:14टालें
लाभ00:14 – 01:45शुभ
उद्वेग01:45 – 03:16टालें
शुभ03:16 – 04:47शुभ
अमृत04:47 – 06:18शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:2007:19दिन
मंगल07:1908:18दिन
सूर्य08:1809:17दिन
शुक्र09:1710:17दिन
बुध10:1711:16दिन
चंद्र11:1612:15दिन
शनि12:1513:14दिन
गुरु13:1414:14दिन
मंगल14:1415:13दिन
सूर्य15:1316:12दिन
शुक्र16:1217:11दिन
बुध17:1118:11दिन
चंद्र18:1119:11रात
शनि19:1120:12रात
गुरु20:1221:12रात
मंगल21:1222:13रात
सूर्य22:1323:14रात
शुक्र23:1400:14रात
बुध00:1401:15रात
चंद्र01:1502:15रात
शनि02:1503:16रात
गुरु03:1604:17रात
मंगल04:1705:17रात
सूर्य05:1706:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
4 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2441° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।