20 अक्टूबर 2029 को मेलबर्न का पंचांग

शनिवार, 20 अक्टूबर 2029, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

शनिवार, 20 अक्टूबर 2029 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (15:48 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (07:31, 21 अक्टू॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:28 पर और सूर्यास्त 19:42 पर है। राहुकाल 09:46 से 11:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:28 – 19:42
रात 06:26 तक
तिथि
त्रयोदशी, 15:48 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 15:48 तक
शुक्ल चतुर्दशी 18:02, 21 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 07:31, 21 अक्टू॰ तक
योग
ध्रुव 12:49 तक
व्याघातअशुभ 13:28, 21 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 15:48 तक
गर 04:53, 21 अक्टू॰ तक
वणिज 18:02, 21 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:28
सूर्यास्त
19:42
चंद्रोदय
17:51
चंद्रास्त
04:57
दिनमान
13h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
09:46 – 11:26
यमगंड
14:44 – 16:23
गुलिक काल
06:28 – 08:07

20 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:28 – 08:07टालें
शुभ08:07 – 09:46शुभ
रोग09:46 – 11:26टालें
उद्वेग11:26 – 13:05टालें
चर13:05 – 14:44सामान्य
लाभ14:44 – 16:23शुभ
अमृत16:23 – 18:03शुभ
काल18:03 – 19:42टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:42 – 21:02शुभ
उद्वेग21:02 – 22:23टालें
शुभ22:23 – 23:44शुभ
अमृत23:44 – 01:04शुभ
चर01:04 – 02:25सामान्य
रोग02:25 – 03:45टालें
काल03:45 – 05:06टालें
लाभ05:06 – 06:26शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:2807:34दिन
गुरु07:3408:40दिन
मंगल08:4009:46दिन
सूर्य09:4610:52दिन
शुक्र10:5211:59दिन
बुध11:5913:05दिन
चंद्र13:0514:11दिन
शनि14:1115:17दिन
गुरु15:1716:23दिन
मंगल16:2317:29दिन
सूर्य17:2918:36दिन
शुक्र18:3619:42दिन
बुध19:4220:36रात
चंद्र20:3621:29रात
शनि21:2922:23रात
गुरु22:2323:17रात
मंगल23:1700:10रात
सूर्य00:1001:04रात
शुक्र01:0401:58रात
बुध01:5802:52रात
चंद्र02:5203:45रात
शनि03:4504:39रात
गुरु04:3905:33रात
मंगल05:3306:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2733° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।