8 जुलाई 2026 को मुंबई का पंचांग

बुधवार, 8 जुलाई 2026, मुंबई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 8 जुलाई 2026 को मुंबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (12:22 तक), नक्षत्र रेवती (16:00 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 12:43 से 14:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 19:20
रात 06:07 तक
तिथि
अष्टमी, 12:22 तक
नवमी
नक्षत्र
रेवती, 16:00 तक
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 जुलाई 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 12:22 तक
कृष्ण नवमी 10:38, 9 जुल॰ तक
नक्षत्र
रेवती 16:00 तक
अश्विनी 14:56, 9 जुल॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 12:38 तक
सुकर्मा 10:12, 9 जुल॰ तक
करण
कौलव 12:22 तक
तैतिल 23:35 तक
गर 10:38, 9 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मीन 16:00 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
00:13
चंद्रास्त
13:07
दिनमान
13h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:40 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
12:17 – 13:09 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:43 – 14:22
यमगंड
07:45 – 09:25
गुलिक काल
11:04 – 12:43

8 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:06 – 07:45शुभ
अमृत07:45 – 09:25शुभ
काल09:25 – 11:04टालें
शुभ11:04 – 12:43शुभ
रोग12:43 – 14:22टालें
उद्वेग14:22 – 16:01टालें
चर16:01 – 17:41सामान्य
लाभ17:41 – 19:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:20 – 20:41टालें
शुभ20:41 – 22:01शुभ
अमृत22:01 – 23:22शुभ
चर23:22 – 00:43सामान्य
रोग00:43 – 02:04टालें
काल02:04 – 03:25टालें
लाभ03:25 – 04:46शुभ
उद्वेग04:46 – 06:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0607:12दिन
चंद्र07:1208:19दिन
शनि08:1909:25दिन
गुरु09:2510:31दिन
मंगल10:3111:37दिन
सूर्य11:3712:43दिन
शुक्र12:4313:49दिन
बुध13:4914:55दिन
चंद्र14:5516:01दिन
शनि16:0117:08दिन
गुरु17:0818:14दिन
मंगल18:1419:20दिन
सूर्य19:2020:14रात
शुक्र20:1421:08रात
बुध21:0822:01रात
चंद्र22:0122:55रात
शनि22:5523:49रात
गुरु23:4900:43रात
मंगल00:4301:37रात
सूर्य01:3702:31रात
शुक्र02:3103:25रात
बुध03:2504:19रात
चंद्र04:1905:13रात
शनि05:1306:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जुल॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां मुंबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2275° (लाहिड़ी)। समय मुंबई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।