1 जुलाई 2029 को मुंबई का पंचांग

रविवार, 1 जुलाई 2029, मुंबई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 1 जुलाई 2029 को मुंबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (06:53 तक), नक्षत्र शतभिषा (16:08 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 17:40 से 19:20 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 19:20
रात 06:04 तक
तिथि
षष्ठी
नक्षत्र
शतभिषा, 16:08 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जुलाई 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 06:53 तक
कृष्ण षष्ठी 08:22, 2 जुल॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 16:08 तक
पूर्वा भाद्रपद 18:27, 2 जुल॰ तक
योग
आयुष्मान 00:07, 2 जुल॰ तक
सौभाग्य 00:37, 3 जुल॰ तक
करण
तैतिल 06:53 तक
गर 19:33 तक
वणिज 08:22, 2 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
23:06
चंद्रास्त
10:40
दिनमान
13h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
12:15 – 13:08

अशुभ समय

राहुकाल
17:40 – 19:20
यमगंड
12:42 – 14:21
गुलिक काल
16:01 – 17:40

1 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:04 – 07:44टालें
चर07:44 – 09:23सामान्य
लाभ09:23 – 11:02शुभ
अमृत11:02 – 12:42शुभ
काल12:42 – 14:21टालें
शुभ14:21 – 16:01शुभ
रोग16:01 – 17:40टालें
उद्वेग17:40 – 19:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:20 – 20:40शुभ
अमृत20:40 – 22:01शुभ
चर22:01 – 23:21सामान्य
रोग23:21 – 00:42टालें
काल00:42 – 02:03टालें
लाभ02:03 – 03:23शुभ
उद्वेग03:23 – 04:44टालें
शुभ04:44 – 06:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0407:10दिन
शुक्र07:1008:17दिन
बुध08:1709:23दिन
चंद्र09:2310:29दिन
शनि10:2911:36दिन
गुरु11:3612:42दिन
मंगल12:4213:48दिन
सूर्य13:4814:54दिन
शुक्र14:5416:01दिन
बुध16:0117:07दिन
चंद्र17:0718:13दिन
शनि18:1319:20दिन
गुरु19:2020:13रात
मंगल20:1321:07रात
सूर्य21:0722:01रात
शुक्र22:0122:55रात
बुध22:5523:48रात
चंद्र23:4800:42रात
शनि00:4201:36रात
गुरु01:3602:29रात
मंगल02:2903:23रात
सूर्य03:2304:17रात
शुक्र04:1705:11रात
बुध05:1106:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां मुंबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2691° (लाहिड़ी)। समय मुंबई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।