17 अक्टूबर 2026 को नैरोबी का पंचांग

शनिवार, 17 अक्टूबर 2026, नैरोबी, Kenya। समय Africa/Nairobi में है।

शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को नैरोबी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (05:58, 18 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मूल (07:17 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 09:16 से 10:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 18:22
रात 06:13 तक
तिथि
सप्तमी, 05:58 तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 05:58, 18 अक्टू॰ तक
शुक्ल अष्टमी 08:22, 19 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 07:17 तक
पूर्वाषाढ़ा 10:19, 18 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 20:32 तक
सुकर्मा 21:26, 18 अक्टू॰ तक
करण
गर 16:42 तक
वणिज 05:58, 18 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 19:12, 18 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
11:30
चंद्रास्त
23:59
दिनमान
12h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:39 – 05:26
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
09:16 – 10:47
यमगंड
13:49 – 15:20
गुलिक काल
06:13 – 07:45

17 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:13 – 07:45टालें
शुभ07:45 – 09:16शुभ
रोग09:16 – 10:47टालें
उद्वेग10:47 – 12:18टालें
चर12:18 – 13:49सामान्य
लाभ13:49 – 15:20शुभ
अमृत15:20 – 16:51शुभ
काल16:51 – 18:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:22 – 19:51शुभ
उद्वेग19:51 – 21:20टालें
शुभ21:20 – 22:49शुभ
अमृत22:49 – 00:18शुभ
चर00:18 – 01:46सामान्य
रोग01:46 – 03:15टालें
काल03:15 – 04:44टालें
लाभ04:44 – 06:13शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:1307:14दिन
गुरु07:1408:15दिन
मंगल08:1509:16दिन
सूर्य09:1610:16दिन
शुक्र10:1611:17दिन
बुध11:1712:18दिन
चंद्र12:1813:18दिन
शनि13:1814:19दिन
गुरु14:1915:20दिन
मंगल15:2016:20दिन
सूर्य16:2017:21दिन
शुक्र17:2118:22दिन
बुध18:2219:21रात
चंद्र19:2120:20रात
शनि20:2021:20रात
गुरु21:2022:19रात
मंगल22:1923:18रात
सूर्य23:1800:18रात
शुक्र00:1801:17रात
बुध01:1702:16रात
चंद्र02:1603:15रात
शनि03:1504:15रात
गुरु04:1505:14रात
मंगल05:1406:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नैरोबी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2313° (लाहिड़ी)। समय नैरोबी (Africa/Nairobi) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।