20 सितंबर 2025 को नांदेड़ का पंचांग

शनिवार, 20 सितंबर 2025, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 20 सितंबर 2025 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (00:17, 21 सित॰ तक), नक्षत्र मघा (08:05 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 09:11 से 10:42 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 18:18
रात 06:09 तक
तिथि
चतुर्दशी, 00:17 तक
अमावस्या
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 सितंबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 00:17, 21 सित॰ तक
अमावस्या 01:24, 22 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 08:05 तक
पूर्वा फाल्गुनी 09:32, 21 सित॰ तक
योग
साध्य 20:06 तक
शुभ 19:52, 21 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:54 तक
शकुनि 00:17, 21 सित॰ तक
चतुष्पद 12:47, 21 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
04:41
चंद्रास्त
17:28
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
09:11 – 10:42
यमगंड
13:45 – 15:16
गुलिक काल
06:09 – 07:40

20 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:09 – 07:40टालें
शुभ07:40 – 09:11शुभ
रोग09:11 – 10:42टालें
उद्वेग10:42 – 12:14टालें
चर12:14 – 13:45सामान्य
लाभ13:45 – 15:16शुभ
अमृत15:16 – 16:47शुभ
काल16:47 – 18:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:18 – 19:47शुभ
उद्वेग19:47 – 21:16टालें
शुभ21:16 – 22:45शुभ
अमृत22:45 – 00:14शुभ
चर00:14 – 01:42सामान्य
रोग01:42 – 03:11टालें
काल03:11 – 04:40टालें
लाभ04:40 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0907:10दिन
गुरु07:1008:10दिन
मंगल08:1009:11दिन
सूर्य09:1110:12दिन
शुक्र10:1211:13दिन
बुध11:1312:14दिन
चंद्र12:1413:14दिन
शनि13:1414:15दिन
गुरु14:1515:16दिन
मंगल15:1616:17दिन
सूर्य16:1717:17दिन
शुक्र17:1718:18दिन
बुध18:1819:18रात
चंद्र19:1820:17रात
शनि20:1721:16रात
गुरु21:1622:15रात
मंगल22:1523:14रात
सूर्य23:1400:14रात
शुक्र00:1401:13रात
बुध01:1302:12रात
चंद्र02:1203:11रात
शनि03:1104:11रात
गुरु04:1105:10रात
मंगल05:1006:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2163° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।