23 अगस्त 2027 को नांदेड़ का पंचांग

सोमवार, 23 अगस्त 2027, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 23 अगस्त 2027 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (20:53 तक), नक्षत्र अश्विनी (12:11 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 18:43 पर है। राहुकाल 07:38 से 09:13 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 18:43
रात 06:03 तक
तिथि
षष्ठी, 20:53 तक
सप्तमी
नक्षत्र
अश्विनी, 12:11 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अगस्त 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 20:53 तक
कृष्ण सप्तमी 20:25, 24 अग॰ तक
नक्षत्र
भरणी 12:37, 24 अग॰ तक
योग
वृद्धि 01:18, 24 अग॰ तक
ध्रुव 23:48, 24 अग॰ तक
करण
गर 08:54 तक
वणिज 20:53 तक
विष्टि (भद्रा) 08:43, 24 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
18:43
चंद्रोदय
22:19
चंद्रास्त
10:53
दिनमान
12h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
07:38 – 09:13
यमगंड
10:48 – 12:23
गुलिक काल
13:58 – 15:33

23 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:03 – 07:38शुभ
काल07:38 – 09:13टालें
शुभ09:13 – 10:48शुभ
रोग10:48 – 12:23टालें
उद्वेग12:23 – 13:58टालें
चर13:58 – 15:33सामान्य
लाभ15:33 – 17:08शुभ
अमृत17:08 – 18:43शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:43 – 20:08सामान्य
रोग20:08 – 21:33टालें
काल21:33 – 22:58टालें
लाभ22:58 – 00:23शुभ
उद्वेग00:23 – 01:48टालें
शुभ01:48 – 03:13शुभ
अमृत03:13 – 04:38शुभ
चर04:38 – 06:03सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0307:06दिन
शनि07:0608:10दिन
गुरु08:1009:13दिन
मंगल09:1310:16दिन
सूर्य10:1611:20दिन
शुक्र11:2012:23दिन
बुध12:2313:26दिन
चंद्र13:2614:29दिन
शनि14:2915:33दिन
गुरु15:3316:36दिन
मंगल16:3617:39दिन
सूर्य17:3918:43दिन
शुक्र18:4319:39रात
बुध19:3920:36रात
चंद्र20:3621:33रात
शनि21:3322:30रात
गुरु22:3023:26रात
मंगल23:2600:23रात
सूर्य00:2301:20रात
शुक्र01:2002:16रात
बुध02:1603:13रात
चंद्र03:1304:10रात
शनि04:1005:07रात
गुरु05:0706:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2432° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।