13 फ़रवरी 2028 को नांदेड़ का पंचांग

रविवार, 13 फ़रवरी 2028, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 13 फ़रवरी 2028 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (09:40 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (16:36 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:50 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 16:53 से 18:19 तक है।

दिन और रात
दिन 06:50 – 18:19
रात 06:50 तक
तिथि
चतुर्थी, 06:42 तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 16:36 तक
हस्त
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 09:40 तक
कृष्ण चतुर्थी 06:42, 14 फ़र॰ तक
कृष्ण पंचमी 04:19, 15 फ़र॰ तक
नक्षत्र
हस्त 14:33, 14 फ़र॰ तक
योग
धृति 02:47, 14 फ़र॰ तक
शूलअशुभ 23:32, 14 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:40 तक
बव 20:07 तक
बालव 06:42, 14 फ़र॰ तक
कौलव 17:25, 14 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:50
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
21:17
चंद्रास्त
08:34
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:10 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
16:53 – 18:19
यमगंड
12:35 – 14:01
गुलिक काल
15:27 – 16:53

13 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:50 – 08:16टालें
चर08:16 – 09:42सामान्य
लाभ09:42 – 11:08शुभ
अमृत11:08 – 12:35शुभ
काल12:35 – 14:01टालें
शुभ14:01 – 15:27शुभ
रोग15:27 – 16:53टालें
उद्वेग16:53 – 18:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:19 – 19:53शुभ
अमृत19:53 – 21:27शुभ
चर21:27 – 23:00सामान्य
रोग23:00 – 00:34टालें
काल00:34 – 02:08टालें
लाभ02:08 – 03:42शुभ
उद्वेग03:42 – 05:16टालें
शुभ05:16 – 06:50शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:5007:47दिन
शुक्र07:4708:45दिन
बुध08:4509:42दिन
चंद्र09:4210:40दिन
शनि10:4011:37दिन
गुरु11:3712:35दिन
मंगल12:3513:32दिन
सूर्य13:3214:29दिन
शुक्र14:2915:27दिन
बुध15:2716:24दिन
चंद्र16:2417:22दिन
शनि17:2218:19दिन
गुरु18:1919:22रात
मंगल19:2220:24रात
सूर्य20:2421:27रात
शुक्र21:2722:29रात
बुध22:2923:32रात
चंद्र23:3200:34रात
शनि00:3401:37रात
गुरु01:3702:39रात
मंगल02:3903:42रात
सूर्य03:4204:44रात
शुक्र04:4405:47रात
बुध05:4706:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2498° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।