11 नवंबर 2028 को नांदेड़ का पंचांग

शनिवार, 11 नवंबर 2028, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 नवंबर 2028 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (11:59 तक), नक्षत्र मघा (12:20 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:26 पर और सूर्यास्त 17:43 पर है। राहुकाल 09:15 से 10:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:26 – 17:43
रात 06:26 तक
तिथि
नवमी, 11:59 तक
दशमी
नक्षत्र
मघा, 12:20 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 नवंबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण नवमी 11:59 तक
कृष्ण दशमी 09:30, 12 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 12:20 तक
योग
इंद्र 01:08, 12 नव॰ तक
वैधृतिअशुभ 21:44, 12 नव॰ तक
करण
गर 11:59 तक
वणिज 22:48 तक
विष्टि (भद्रा) 09:30, 12 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:26
सूर्यास्त
17:43
चंद्रोदय
00:54
चंद्रास्त
13:36
दिनमान
11h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:44 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
09:15 – 10:40
यमगंड
13:29 – 14:53
गुलिक काल
06:26 – 07:50

11 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:26 – 07:50टालें
शुभ07:50 – 09:15शुभ
रोग09:15 – 10:40टालें
उद्वेग10:40 – 12:04टालें
चर12:04 – 13:29सामान्य
लाभ13:29 – 14:53शुभ
अमृत14:53 – 16:18शुभ
काल16:18 – 17:43टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:43 – 19:18शुभ
उद्वेग19:18 – 20:54टालें
शुभ20:54 – 22:29शुभ
अमृत22:29 – 00:04शुभ
चर00:04 – 01:40सामान्य
रोग01:40 – 03:15टालें
काल03:15 – 04:51टालें
लाभ04:51 – 06:26शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:2607:22दिन
गुरु07:2208:19दिन
मंगल08:1909:15दिन
सूर्य09:1510:11दिन
शुक्र10:1111:08दिन
बुध11:0812:04दिन
चंद्र12:0413:01दिन
शनि13:0113:57दिन
गुरु13:5714:53दिन
मंगल14:5315:50दिन
सूर्य15:5016:46दिन
शुक्र16:4617:43दिन
बुध17:4318:46रात
चंद्र18:4619:50रात
शनि19:5020:54रात
गुरु20:5421:57रात
मंगल21:5723:01रात
सूर्य23:0100:04रात
शुक्र00:0401:08रात
बुध01:0802:12रात
चंद्र02:1203:15रात
शनि03:1504:19रात
गुरु04:1905:23रात
मंगल05:2306:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 दिस॰ 2028मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
5 दिस॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2602° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।