14 मार्च 2029 को नांदेड़ का पंचांग

बुधवार, 14 मार्च 2029, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 14 मार्च 2029 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (07:33 तक), नक्षत्र शतभिषा (12:32 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:29 पर और सूर्यास्त 18:30 पर है। राहुकाल 12:30 से 14:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:29 – 18:30
रात 06:29 तक
तिथि
अमावस्या
नक्षत्र
शतभिषा, 12:32 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 मार्च 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 07:33 तक
अमावस्या 09:49, 15 मार्च तक
नक्षत्र
शतभिषा 12:32 तक
पूर्वा भाद्रपद 15:19, 15 मार्च तक
योग
साध्य 19:14 तक
शुभ 19:58, 15 मार्च तक
करण
शकुनि 07:33 तक
चतुष्पद 20:40 तक
नाग 09:49, 15 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:29
सूर्यास्त
18:30
चंद्रोदय
05:41
चंद्रास्त
17:54
दिनमान
12h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:54 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:30 – 14:00
यमगंड
07:59 – 09:29
गुलिक काल
10:59 – 12:30

14 मार्च 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:29 – 07:59शुभ
अमृत07:59 – 09:29शुभ
काल09:29 – 10:59टालें
शुभ10:59 – 12:30शुभ
रोग12:30 – 14:00टालें
उद्वेग14:00 – 15:30टालें
चर15:30 – 17:00सामान्य
लाभ17:00 – 18:30शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:30 – 20:00टालें
शुभ20:00 – 21:29शुभ
अमृत21:29 – 22:59शुभ
चर22:59 – 00:29सामान्य
रोग00:29 – 01:59टालें
काल01:59 – 03:29टालें
लाभ03:29 – 04:59शुभ
उद्वेग04:59 – 06:29टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2907:29दिन
चंद्र07:2908:29दिन
शनि08:2909:29दिन
गुरु09:2910:29दिन
मंगल10:2911:30दिन
सूर्य11:3012:30दिन
शुक्र12:3013:30दिन
बुध13:3014:30दिन
चंद्र14:3015:30दिन
शनि15:3016:30दिन
गुरु16:3017:30दिन
मंगल17:3018:30दिन
सूर्य18:3019:30रात
शुक्र19:3020:29रात
बुध20:2921:29रात
चंद्र21:2922:29रात
शनि22:2923:29रात
गुरु23:2900:29रात
मंगल00:2901:29रात
सूर्य01:2902:29रात
शुक्र02:2903:29रात
बुध03:2904:29रात
चंद्र04:2905:29रात
शनि05:2906:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 मार्च 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 मार्च 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 मार्च 2029अधिक चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
2 अप्रैल 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अप्रैल 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अप्रैल 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 अप्रैल 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2649° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।