27 मार्च 2002 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 27 मार्च 2002, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 27 मार्च 2002 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (07:40 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (20:45 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:17 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 12:26 से 13:59 तक है।

दिन और रात
दिन 06:17 – 18:36
रात 06:16 तक
तिथि
चतुर्दशी, 03:50 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 20:45 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 मार्च 2002 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 07:40 तक
शुक्ल चतुर्दशी 03:50, 28 मार्च तक
पूर्णिमा 23:54, 28 मार्च तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 17:38, 28 मार्च तक
योग
शूलअशुभ 06:38 तक
गंडअशुभ 02:19, 28 मार्च तक
वृद्धि 21:55, 28 मार्च तक
करण
तैतिल 07:40 तक
गर 17:47 तक
वणिज 03:50, 28 मार्च तक
विष्टि (भद्रा) 13:52, 28 मार्च तक
चंद्र राशि
सिंह 01:59, 28 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:17
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
17:07
चंद्रास्त
05:27
दिनमान
12h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:51 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:26 – 13:59
यमगंड
07:49 – 09:22
गुलिक काल
10:54 – 12:26

27 मार्च 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:17 – 07:49शुभ
अमृत07:49 – 09:22शुभ
काल09:22 – 10:54टालें
शुभ10:54 – 12:26शुभ
रोग12:26 – 13:59टालें
उद्वेग13:59 – 15:31टालें
चर15:31 – 17:03सामान्य
लाभ17:03 – 18:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:36 – 20:03टालें
शुभ20:03 – 21:31शुभ
अमृत21:31 – 22:58शुभ
चर22:58 – 00:26सामान्य
रोग00:26 – 01:53टालें
काल01:53 – 03:21टालें
लाभ03:21 – 04:48शुभ
उद्वेग04:48 – 06:16टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:1707:19दिन
चंद्र07:1908:20दिन
शनि08:2009:22दिन
गुरु09:2210:23दिन
मंगल10:2311:25दिन
सूर्य11:2512:26दिन
शुक्र12:2613:28दिन
बुध13:2814:29दिन
चंद्र14:2915:31दिन
शनि15:3116:33दिन
गुरु16:3317:34दिन
मंगल17:3418:36दिन
सूर्य18:3619:34रात
शुक्र19:3420:32रात
बुध20:3221:31रात
चंद्र21:3122:29रात
शनि22:2923:27रात
गुरु23:2700:26रात
मंगल00:2601:24रात
सूर्य01:2402:22रात
शुक्र02:2203:21रात
बुध03:2104:19रात
चंद्र04:1905:18रात
शनि05:1806:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 मार्च 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 मार्च 2002फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
1 अप्रैल 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 अप्रैल 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 अप्रैल 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अप्रैल 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अप्रैल 2002चैत्र अमावस्याअमावस्या
14 अप्रैल 2002मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
23 अप्रैल 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 अप्रैल 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8882° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।