12 जनवरी 2004 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 12 जनवरी 2004, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 12 जनवरी 2004 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (00:29, 13 जन॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (22:04 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:15 पर और सूर्यास्त 17:43 पर है। राहुकाल 08:33 से 09:52 तक है।

दिन और रात
दिन 07:15 – 17:43
रात 07:15 तक
तिथि
पंचमी, 00:29 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 22:04 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जनवरी 2004 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 00:29, 13 जन॰ तक
कृष्ण षष्ठी 23:55, 13 जन॰ तक
नक्षत्र
योग
सौभाग्य 19:59 तक
शोभन 18:24, 13 जन॰ तक
करण
कौलव 12:37 तक
तैतिल 00:29, 13 जन॰ तक
गर 12:15, 13 जन॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 04:07, 13 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:15
सूर्यास्त
17:43
चंद्रोदय
22:11
चंद्रास्त
10:28
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:21
अभिजीत मुहूर्त
12:08 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
08:33 – 09:52
यमगंड
11:10 – 12:29
गुलिक काल
13:47 – 15:06

12 जनवरी 2004 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:15 – 08:33शुभ
काल08:33 – 09:52टालें
शुभ09:52 – 11:10शुभ
रोग11:10 – 12:29टालें
उद्वेग12:29 – 13:47टालें
चर13:47 – 15:06सामान्य
लाभ15:06 – 16:24शुभ
अमृत16:24 – 17:43शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:43 – 19:24सामान्य
रोग19:24 – 21:06टालें
काल21:06 – 22:47टालें
लाभ22:47 – 00:29शुभ
उद्वेग00:29 – 02:10टालें
शुभ02:10 – 03:52शुभ
अमृत03:52 – 05:33शुभ
चर05:33 – 07:15सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1508:07दिन
शनि08:0708:59दिन
गुरु08:5909:52दिन
मंगल09:5210:44दिन
सूर्य10:4411:36दिन
शुक्र11:3612:29दिन
बुध12:2913:21दिन
चंद्र13:2114:13दिन
शनि14:1315:06दिन
गुरु15:0615:58दिन
मंगल15:5816:50दिन
सूर्य16:5017:43दिन
शुक्र17:4318:50रात
बुध18:5019:58रात
चंद्र19:5821:06रात
शनि21:0622:13रात
गुरु22:1323:21रात
मंगल23:2100:29रात
सूर्य00:2901:36रात
शुक्र01:3602:44रात
बुध02:4403:52रात
चंद्र03:5204:59रात
शनि04:5906:07रात
गुरु06:0707:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जन॰ 2004मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
18 जन॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जन॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 जन॰ 2004माघ अमावस्याअमावस्या
25 जन॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 फ़र॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 फ़र॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2004माघ पूर्णिमापूर्णिमा
10 फ़र॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9133° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।