27 दिसंबर 2004 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 27 दिसंबर 2004, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 27 दिसंबर 2004 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (23:07 तक), नक्षत्र आर्द्रा (14:14 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 07:12 पर और सूर्यास्त 17:32 पर है। राहुकाल 08:29 से 09:47 तक है।

दिन और रात
दिन 07:12 – 17:32
रात 07:12 तक
तिथि
प्रतिपदा, 23:07 तक
द्वितीया
नक्षत्र
आर्द्रा, 14:14 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 दिसंबर 2004 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 23:07 तक
कृष्ण द्वितीया 01:39, 29 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 17:11, 28 दिस॰ तक
योग
ब्रह्म 16:41 तक
इंद्र 17:30, 28 दिस॰ तक
करण
बालव 09:51 तक
कौलव 23:07 तक
तैतिल 12:23, 28 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:12
सूर्यास्त
17:32
चंद्रोदय
18:01
चंद्रास्त
07:52
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2061
शक संवत
1926, तारण संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:17
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
08:29 – 09:47
यमगंड
11:04 – 12:22
गुलिक काल
13:39 – 14:57

27 दिसंबर 2004 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:12 – 08:29शुभ
काल08:29 – 09:47टालें
शुभ09:47 – 11:04शुभ
रोग11:04 – 12:22टालें
उद्वेग12:22 – 13:39टालें
चर13:39 – 14:57सामान्य
लाभ14:57 – 16:14शुभ
अमृत16:14 – 17:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:32 – 19:14सामान्य
रोग19:14 – 20:57टालें
काल20:57 – 22:39टालें
लाभ22:39 – 00:22शुभ
उद्वेग00:22 – 02:05टालें
शुभ02:05 – 03:47शुभ
अमृत03:47 – 05:30शुभ
चर05:30 – 07:12सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1208:04दिन
शनि08:0408:55दिन
गुरु08:5509:47दिन
मंगल09:4710:39दिन
सूर्य10:3911:30दिन
शुक्र11:3012:22दिन
बुध12:2213:14दिन
चंद्र13:1414:05दिन
शनि14:0514:57दिन
गुरु14:5715:48दिन
मंगल15:4816:40दिन
सूर्य16:4017:32दिन
शुक्र17:3218:40रात
बुध18:4019:49रात
चंद्र19:4920:57रात
शनि20:5722:05रात
गुरु22:0523:14रात
मंगल23:1400:22रात
सूर्य00:2201:30रात
शुक्र01:3002:39रात
बुध02:3903:47रात
चंद्र03:4704:55रात
शनि04:5506:04रात
गुरु06:0407:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 दिस॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जन॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जन॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 जन॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 जन॰ 2005पौष अमावस्याअमावस्या
13 जन॰ 2005विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2005मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
20 जन॰ 2005शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जन॰ 2005प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जन॰ 2005पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9267° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।