26 जनवरी 2008 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 26 जनवरी 2008, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 26 जनवरी 2008 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (16:22 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (10:17 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 07:12 पर और सूर्यास्त 17:54 पर है। राहुकाल 09:53 से 11:13 तक है।

दिन और रात
दिन 07:12 – 17:54
रात 07:12 तक
तिथि
चतुर्थी, 16:22 तक
पंचमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जनवरी 2008 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 16:22 तक
कृष्ण पंचमी 17:26, 27 जन॰ तक
नक्षत्र
योग
शोभन 07:28 तक
अतिगंडअशुभ 06:55, 27 जन॰ तक
सुकर्मा 06:52, 28 जन॰ तक
करण
बालव 16:22 तक
कौलव 04:48, 27 जन॰ तक
तैतिल 17:26, 27 जन॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 16:35 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:12
सूर्यास्त
17:54
चंद्रोदय
21:46
चंद्रास्त
09:26
दिनमान
10h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:19
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
09:53 – 11:13
यमगंड
13:53 – 15:14
गुलिक काल
07:12 – 08:32

26 जनवरी 2008 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:12 – 08:32टालें
शुभ08:32 – 09:53शुभ
रोग09:53 – 11:13टालें
उद्वेग11:13 – 12:33टालें
चर12:33 – 13:53सामान्य
लाभ13:53 – 15:14शुभ
अमृत15:14 – 16:34शुभ
काल16:34 – 17:54टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:54 – 19:34शुभ
उद्वेग19:34 – 21:14टालें
शुभ21:14 – 22:53शुभ
अमृत22:53 – 00:33शुभ
चर00:33 – 02:13सामान्य
रोग02:13 – 03:52टालें
काल03:52 – 05:32टालें
लाभ05:32 – 07:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:1208:06दिन
गुरु08:0608:59दिन
मंगल08:5909:53दिन
सूर्य09:5310:46दिन
शुक्र10:4611:40दिन
बुध11:4012:33दिन
चंद्र12:3313:27दिन
शनि13:2714:20दिन
गुरु14:2015:14दिन
मंगल15:1416:07दिन
सूर्य16:0717:01दिन
शुक्र17:0117:54दिन
बुध17:5419:01रात
चंद्र19:0120:07रात
शनि20:0721:14रात
गुरु21:1422:20रात
मंगल22:2023:27रात
सूर्य23:2700:33रात
शुक्र00:3301:39रात
बुध01:3902:46रात
चंद्र02:4603:52रात
शनि03:5204:59रात
गुरु04:5906:05रात
मंगल06:0507:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2008संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 जन॰ 2008कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2008कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 फ़र॰ 2008प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 फ़र॰ 2008माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2008विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2008कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2008शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2008प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 फ़र॰ 2008माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9697° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।