25 जुलाई 2014 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 25 जुलाई 2014, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 25 जुलाई 2014 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (01:57, 26 जुल॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (12:26 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 19:16 पर है। राहुकाल 10:45 से 12:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 19:16
रात 05:39 तक
तिथि
चतुर्दशी, 01:57 तक
अमावस्या
नक्षत्र
आर्द्रा, 12:26 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जुलाई 2014 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 01:57, 26 जुल॰ तक
अमावस्या 04:11, 27 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 15:10, 26 जुल॰ तक
योग
हर्षण 04:06, 26 जुल॰ तक
वज्रअशुभ 04:56, 27 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:54 तक
शकुनि 01:57, 26 जुल॰ तक
चतुष्पद 15:03, 26 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
19:16
चंद्रोदय
04:11
चंद्रास्त
17:58
दिनमान
13h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2071
शक संवत
1936, जय संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
10:45 – 12:27
यमगंड
15:52 – 17:34
गुलिक काल
07:20 – 09:03

25 जुलाई 2014 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:38 – 07:20सामान्य
लाभ07:20 – 09:03शुभ
अमृत09:03 – 10:45शुभ
काल10:45 – 12:27टालें
शुभ12:27 – 14:09शुभ
रोग14:09 – 15:52टालें
उद्वेग15:52 – 17:34टालें
चर17:34 – 19:16सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:16 – 20:34टालें
काल20:34 – 21:52टालें
लाभ21:52 – 23:09शुभ
उद्वेग23:09 – 00:27टालें
शुभ00:27 – 01:45शुभ
अमृत01:45 – 03:03शुभ
चर03:03 – 04:21सामान्य
रोग04:21 – 05:39टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3806:46दिन
बुध06:4607:54दिन
चंद्र07:5409:03दिन
शनि09:0310:11दिन
गुरु10:1111:19दिन
मंगल11:1912:27दिन
सूर्य12:2713:35दिन
शुक्र13:3514:43दिन
बुध14:4315:52दिन
चंद्र15:5217:00दिन
शनि17:0018:08दिन
गुरु18:0819:16दिन
मंगल19:1620:08रात
सूर्य20:0821:00रात
शुक्र21:0021:52रात
बुध21:5222:44रात
चंद्र22:4423:35रात
शनि23:3500:27रात
गुरु00:2701:19रात
मंगल01:1902:11रात
सूर्य02:1103:03रात
शुक्र03:0303:55रात
बुध03:5504:47रात
चंद्र04:4705:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जुल॰ 2014श्रावण अमावस्याअमावस्या
31 जुल॰ 2014विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 अग॰ 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 अग॰ 2014प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 अग॰ 2014श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
14 अग॰ 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अग॰ 2014सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2014कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 अग॰ 2014कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 अग॰ 2014प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0605° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।