28 फ़रवरी 2015 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 28 फ़रवरी 2015, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 28 फ़रवरी 2015 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (12:24 तक), नक्षत्र आर्द्रा (21:35 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 18:20 पर है। राहुकाल 09:40 से 11:07 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 18:20
रात 06:46 तक
तिथि
दशमी, 12:24 तक
एकादशी
नक्षत्र
आर्द्रा, 21:35 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 फ़रवरी 2015 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल दशमी 12:24 तक
शुक्ल एकादशी 14:02, 1 मार्च तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 23:54, 1 मार्च तक
योग
आयुष्मान 05:26, 1 मार्च तक
सौभाग्य 05:49, 2 मार्च तक
करण
गर 12:24 तक
वणिज 01:09, 1 मार्च तक
विष्टि (भद्रा) 14:02, 1 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
13:52
चंद्रास्त
02:50
दिनमान
11h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2071
शक संवत
1936, जय संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 05:57
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
09:40 – 11:07
यमगंड
14:00 – 15:27
गुलिक काल
06:47 – 08:14

28 फ़रवरी 2015 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:47 – 08:14टालें
शुभ08:14 – 09:40शुभ
रोग09:40 – 11:07टालें
उद्वेग11:07 – 12:33टालें
चर12:33 – 14:00सामान्य
लाभ14:00 – 15:27शुभ
अमृत15:27 – 16:53शुभ
काल16:53 – 18:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:20 – 19:53शुभ
उद्वेग19:53 – 21:26टालें
शुभ21:26 – 23:00शुभ
अमृत23:00 – 00:33शुभ
चर00:33 – 02:06सामान्य
रोग02:06 – 03:40टालें
काल03:40 – 05:13टालें
लाभ05:13 – 06:46शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4707:45दिन
गुरु07:4508:43दिन
मंगल08:4309:40दिन
सूर्य09:4010:38दिन
शुक्र10:3811:36दिन
बुध11:3612:33दिन
चंद्र12:3313:31दिन
शनि13:3114:29दिन
गुरु14:2915:27दिन
मंगल15:2716:24दिन
सूर्य16:2417:22दिन
शुक्र17:2218:20दिन
बुध18:2019:22रात
चंद्र19:2220:24रात
शनि20:2421:26रात
गुरु21:2622:28रात
मंगल22:2823:31रात
सूर्य23:3100:33रात
शुक्र00:3301:35रात
बुध01:3502:37रात
चंद्र02:3703:40रात
शनि03:4004:42रात
गुरु04:4205:44रात
मंगल05:4406:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 मार्च 2015शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 मार्च 2015प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 मार्च 2015फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
10 मार्च 2015संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2015कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2015मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्च 2015कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
18 मार्च 2015प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 मार्च 2015चैत्र अमावस्याअमावस्या
23 मार्च 2015विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0688° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।