22 अक्टूबर 2018 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 22 अक्टूबर 2018, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 22 अक्टूबर 2018 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (22:23 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (07:36 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:26 पर और सूर्यास्त 17:44 पर है। राहुकाल 07:50 से 09:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:26 – 17:44
रात 06:26 तक
तिथि
त्रयोदशी, 22:23 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2018 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 22:23 तक
शुक्ल चतुर्दशी 22:36, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 08:47, 23 अक्टू॰ तक
योग
ध्रुव 11:25 तक
व्याघातअशुभ 10:43, 23 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 10:02 तक
तैतिल 22:23 तक
गर 10:34, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:26
सूर्यास्त
17:44
चंद्रोदय
16:40
चंद्रास्त
03:57
दिनमान
11h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2075
शक संवत
1940, विलंब संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:44 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
07:50 – 09:15
यमगंड
10:40 – 12:05
गुलिक काल
13:30 – 14:55

22 अक्टूबर 2018 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:26 – 07:50शुभ
काल07:50 – 09:15टालें
शुभ09:15 – 10:40शुभ
रोग10:40 – 12:05टालें
उद्वेग12:05 – 13:30टालें
चर13:30 – 14:55सामान्य
लाभ14:55 – 16:20शुभ
अमृत16:20 – 17:44शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:44 – 19:20सामान्य
रोग19:20 – 20:55टालें
काल20:55 – 22:30टालें
लाभ22:30 – 00:05शुभ
उद्वेग00:05 – 01:41टालें
शुभ01:41 – 03:16शुभ
अमृत03:16 – 04:51शुभ
चर04:51 – 06:26सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2607:22दिन
शनि07:2208:19दिन
गुरु08:1909:15दिन
मंगल09:1510:12दिन
सूर्य10:1211:08दिन
शुक्र11:0812:05दिन
बुध12:0513:02दिन
चंद्र13:0213:58दिन
शनि13:5814:55दिन
गुरु14:5515:51दिन
मंगल15:5116:48दिन
सूर्य16:4817:44दिन
शुक्र17:4418:48रात
बुध18:4819:51रात
चंद्र19:5120:55रात
शनि20:5521:58रात
गुरु21:5823:02रात
मंगल23:0200:05रात
सूर्य00:0501:09रात
शुक्र01:0902:12रात
बुध02:1203:16रात
चंद्र03:1604:19रात
शनि04:1905:23रात
गुरु05:2306:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अक्टू॰ 2018आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
28 अक्टू॰ 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 नव॰ 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 नव॰ 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 नव॰ 2018प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 नव॰ 2018कार्तिक अमावस्याअमावस्या
11 नव॰ 2018विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2018वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2018शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1197° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।