16 अगस्त 2030 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 16 अगस्त 2030, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 16 अगस्त 2030 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (12:42 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (09:17 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:50 पर और सूर्यास्त 18:59 पर है। राहुकाल 10:46 से 12:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:50 – 18:59
रात 05:51 तक
तिथि
तृतीया, 12:42 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अगस्त 2030 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 12:42 तक
कृष्ण चतुर्थी 12:52, 17 अग॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 10:02, 17 अग॰ तक
योग
सुकर्मा 10:52 तक
धृति 09:56, 17 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:42 तक
बव 00:41, 17 अग॰ तक
बालव 12:52, 17 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
18:59
चंद्रोदय
20:34
चंद्रास्त
08:31
दिनमान
13h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2087
शक संवत
1952, साधारण संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
10:46 – 12:25
यमगंड
15:42 – 17:21
गुलिक काल
07:29 – 09:08

16 अगस्त 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:50 – 07:29सामान्य
लाभ07:29 – 09:08शुभ
अमृत09:08 – 10:46शुभ
काल10:46 – 12:25टालें
शुभ12:25 – 14:03शुभ
रोग14:03 – 15:42टालें
उद्वेग15:42 – 17:21टालें
चर17:21 – 18:59सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:59 – 20:21टालें
काल20:21 – 21:42टालें
लाभ21:42 – 23:04शुभ
उद्वेग23:04 – 00:25टालें
शुभ00:25 – 01:47शुभ
अमृत01:47 – 03:08शुभ
चर03:08 – 04:29सामान्य
रोग04:29 – 05:51टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5006:56दिन
बुध06:5608:02दिन
चंद्र08:0209:08दिन
शनि09:0810:13दिन
गुरु10:1311:19दिन
मंगल11:1912:25दिन
सूर्य12:2513:31दिन
शुक्र13:3114:36दिन
बुध14:3615:42दिन
चंद्र15:4216:48दिन
शनि16:4817:53दिन
गुरु17:5318:59दिन
मंगल18:5919:54रात
सूर्य19:5420:48रात
शुक्र20:4821:42रात
बुध21:4222:36रात
चंद्र22:3623:31रात
शनि23:3100:25रात
गुरु00:2501:19रात
मंगल01:1902:14रात
सूर्य02:1403:08रात
शुक्र03:0804:02रात
बुध04:0204:57रात
चंद्र04:5705:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अग॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अग॰ 2030सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अग॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अग॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 अग॰ 2030भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
1 सित॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 सित॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 सित॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 सित॰ 2030भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2848° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।