3 नवंबर 2033 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 3 नवंबर 2033, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 3 नवंबर 2033 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (15:43 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (22:50 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 13:27 से 14:49 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:34
रात 06:35 तक
तिथि
एकादशी, 15:43 तक
द्वादशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 22:50 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2033 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 15:43 तक
शुक्ल द्वादशी 12:39, 4 नव॰ तक
नक्षत्र
योग
व्याघातअशुभ 03:00, 4 नव॰ तक
हर्षण 23:08, 4 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:43 तक
बव 02:14, 4 नव॰ तक
बालव 12:39, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 17:23 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
15:03
चंद्रास्त
02:24
दिनमान
11h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2090
शक संवत
1955, प्रमादी संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:42
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
13:27 – 14:49
यमगंड
06:34 – 07:57
गुलिक काल
09:19 – 10:42

3 नवंबर 2033 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:34 – 07:57शुभ
रोग07:57 – 09:19टालें
उद्वेग09:19 – 10:42टालें
चर10:42 – 12:04सामान्य
लाभ12:04 – 13:27शुभ
अमृत13:27 – 14:49शुभ
काल14:49 – 16:12टालें
शुभ16:12 – 17:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:34 – 19:12शुभ
चर19:12 – 20:49सामान्य
रोग20:49 – 22:27टालें
काल22:27 – 00:04टालें
लाभ00:04 – 01:42शुभ
उद्वेग01:42 – 03:20टालें
शुभ03:20 – 04:57शुभ
अमृत04:57 – 06:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3407:29दिन
मंगल07:2908:24दिन
सूर्य08:2409:19दिन
शुक्र09:1910:14दिन
बुध10:1411:09दिन
चंद्र11:0912:04दिन
शनि12:0412:59दिन
गुरु12:5913:54दिन
मंगल13:5414:49दिन
सूर्य14:4915:44दिन
शुक्र15:4416:39दिन
बुध16:3917:34दिन
चंद्र17:3418:39रात
शनि18:3919:44रात
गुरु19:4420:49रात
मंगल20:4921:54रात
सूर्य21:5422:59रात
शुक्र22:5900:04रात
बुध00:0401:09रात
चंद्र01:0902:15रात
शनि02:1503:20रात
गुरु03:2004:25रात
मंगल04:2505:30रात
सूर्य05:3006:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 नव॰ 2033शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 नव॰ 2033प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 नव॰ 2033कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
10 नव॰ 2033संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 नव॰ 2033कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2033वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2033कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 नव॰ 2033प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 नव॰ 2033मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
26 नव॰ 2033विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 दिस॰ 2033शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3298° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।