17 जुलाई 2037 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 17 जुलाई 2037, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2037 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (17:58 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (10:58 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 10:44 से 12:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 19:20
रात 05:34 तक
तिथि
पंचमी, 17:58 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 10:58 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जुलाई 2037 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 17:58 तक
शुक्ल षष्ठी 15:22, 18 जुल॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 09:06, 18 जुल॰ तक
योग
वरीयान 15:10 तक
परिघअशुभ 11:58, 18 जुल॰ तक
करण
बव 07:22 तक
बालव 17:58 तक
कौलव 04:38, 18 जुल॰ तक
तैतिल 15:22, 18 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 16:29 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
09:55
चंद्रास्त
22:48
दिनमान
13h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2094
शक संवत
1959, पिंगल संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:53
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
10:44 – 12:27
यमगंड
15:53 – 17:36
गुलिक काल
07:17 – 09:00

17 जुलाई 2037 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:34 – 07:17सामान्य
लाभ07:17 – 09:00शुभ
अमृत09:00 – 10:44शुभ
काल10:44 – 12:27टालें
शुभ12:27 – 14:10शुभ
रोग14:10 – 15:53टालें
उद्वेग15:53 – 17:36टालें
चर17:36 – 19:20सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:20 – 20:36टालें
काल20:36 – 21:53टालें
लाभ21:53 – 23:10शुभ
उद्वेग23:10 – 00:27टालें
शुभ00:27 – 01:44शुभ
अमृत01:44 – 03:01शुभ
चर03:01 – 04:18सामान्य
रोग04:18 – 05:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3406:43दिन
बुध06:4307:52दिन
चंद्र07:5209:00दिन
शनि09:0010:09दिन
गुरु10:0911:18दिन
मंगल11:1812:27दिन
सूर्य12:2713:36दिन
शुक्र13:3614:44दिन
बुध14:4415:53दिन
चंद्र15:5317:02दिन
शनि17:0218:11दिन
गुरु18:1119:20दिन
मंगल19:2020:11रात
सूर्य20:1121:02रात
शुक्र21:0221:53रात
बुध21:5322:45रात
चंद्र22:4523:36रात
शनि23:3600:27रात
गुरु00:2701:18रात
मंगल01:1802:10रात
सूर्य02:1003:01रात
शुक्र03:0103:52रात
बुध03:5204:43रात
चंद्र04:4305:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जुल॰ 2037शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 जुल॰ 2037प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 जुल॰ 2037आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
31 जुल॰ 2037संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अग॰ 2037कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 अग॰ 2037कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 अग॰ 2037प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 अग॰ 2037श्रावण अमावस्याअमावस्या
14 अग॰ 2037विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3815° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।