23 दिसंबर 2041 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 23 दिसंबर 2041, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 23 दिसंबर 2041 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (13:36 तक), नक्षत्र मूल (23:49 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 07:10 पर और सूर्यास्त 17:29 पर है। राहुकाल 08:28 से 09:45 तक है।

दिन और रात
दिन 07:10 – 17:29
रात 07:11 तक
तिथि
अमावस्या, 13:36 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मूल, 23:49 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 दिसंबर 2041 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
अमावस्या 13:36 तक
शुक्ल प्रतिपदा 11:51, 24 दिस॰ तक
नक्षत्र
मूल 23:49 तक
पूर्वाषाढ़ा 22:34, 24 दिस॰ तक
योग
गंडअशुभ 11:10 तक
वृद्धि 08:35, 24 दिस॰ तक
करण
नाग 13:36 तक
किंस्तुघ्न 00:47, 24 दिस॰ तक
बव 11:51, 24 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:10
सूर्यास्त
17:29
चंद्रोदय
07:11
चंद्रास्त
17:22
दिनमान
10h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2098
शक संवत
1963, दुर्मति संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:21 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
08:28 – 09:45
यमगंड
11:02 – 12:20
गुलिक काल
13:37 – 14:55

23 दिसंबर 2041 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:10 – 08:28शुभ
काल08:28 – 09:45टालें
शुभ09:45 – 11:02शुभ
रोग11:02 – 12:20टालें
उद्वेग12:20 – 13:37टालें
चर13:37 – 14:55सामान्य
लाभ14:55 – 16:12शुभ
अमृत16:12 – 17:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:29 – 19:12सामान्य
रोग19:12 – 20:55टालें
काल20:55 – 22:37टालें
लाभ22:37 – 00:20शुभ
उद्वेग00:20 – 02:03टालें
शुभ02:03 – 03:45शुभ
अमृत03:45 – 05:28शुभ
चर05:28 – 07:11सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1008:02दिन
शनि08:0208:53दिन
गुरु08:5309:45दिन
मंगल09:4510:37दिन
सूर्य10:3711:28दिन
शुक्र11:2812:20दिन
बुध12:2013:11दिन
चंद्र13:1114:03दिन
शनि14:0314:55दिन
गुरु14:5515:46दिन
मंगल15:4616:38दिन
सूर्य16:3817:29दिन
शुक्र17:2918:38रात
बुध18:3819:46रात
चंद्र19:4620:55रात
शनि20:5522:03रात
गुरु22:0323:12रात
मंगल23:1200:20रात
सूर्य00:2001:28रात
शुक्र01:2802:37रात
बुध02:3703:45रात
चंद्र03:4504:54रात
शनि04:5406:02रात
गुरु06:0207:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 दिस॰ 2041पौष अमावस्याअमावस्या
26 दिस॰ 2041विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जन॰ 2042शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जन॰ 2042प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जन॰ 2042पौष पूर्णिमापूर्णिमा
10 जन॰ 2042संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 जन॰ 2042कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2042मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2042कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 जन॰ 2042प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 जन॰ 2042माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4435° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।