17 दिसंबर 2043 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 17 दिसंबर 2043, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 17 दिसंबर 2043 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (09:41 तक), नक्षत्र आर्द्रा (21:23 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 17:26 पर है। राहुकाल 13:34 से 14:51 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 17:26
रात 07:07 तक
तिथि
द्वितीया, 06:08 तक
नक्षत्र
आर्द्रा, 21:23 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 दिसंबर 2043 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 09:41 तक
कृष्ण द्वितीया 06:08, 18 दिस॰ तक
कृष्ण तृतीया 03:03, 19 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 18:49, 18 दिस॰ तक
योग
शुक्ल 19:43 तक
ब्रह्म 15:45, 18 दिस॰ तक
करण
कौलव 09:41 तक
तैतिल 19:52 तक
गर 06:08, 18 दिस॰ तक
वणिज 16:32, 18 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:26
चंद्रोदय
18:28
चंद्रास्त
08:13
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2100
शक संवत
1965, रुधिरोद्गारी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:12
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
13:34 – 14:51
यमगंड
07:07 – 08:24
गुलिक काल
09:42 – 10:59

17 दिसंबर 2043 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:07 – 08:24शुभ
रोग08:24 – 09:42टालें
उद्वेग09:42 – 10:59टालें
चर10:59 – 12:17सामान्य
लाभ12:17 – 13:34शुभ
अमृत13:34 – 14:51शुभ
काल14:51 – 16:09टालें
शुभ16:09 – 17:26शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:26 – 19:09शुभ
चर19:09 – 20:52सामान्य
रोग20:52 – 22:34टालें
काल22:34 – 00:17टालें
लाभ00:17 – 01:59शुभ
उद्वेग01:59 – 03:42टालें
शुभ03:42 – 05:25शुभ
अमृत05:25 – 07:07शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:0707:58दिन
मंगल07:5808:50दिन
सूर्य08:5009:42दिन
शुक्र09:4210:33दिन
बुध10:3311:25दिन
चंद्र11:2512:17दिन
शनि12:1713:08दिन
गुरु13:0814:00दिन
मंगल14:0014:51दिन
सूर्य14:5115:43दिन
शुक्र15:4316:35दिन
बुध16:3517:26दिन
चंद्र17:2618:35रात
शनि18:3519:43रात
गुरु19:4320:52रात
मंगल20:5222:00रात
सूर्य22:0023:08रात
शुक्र23:0800:17रात
बुध00:1701:25रात
चंद्र01:2502:34रात
शनि02:3403:42रात
गुरु03:4204:50रात
मंगल04:5005:59रात
सूर्य05:5907:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 दिस॰ 2043संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 दिस॰ 2043कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 दिस॰ 2043कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 दिस॰ 2043प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 दिस॰ 2043पौष अमावस्याअमावस्या
4 जन॰ 2044विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 जन॰ 2044शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 जन॰ 2044प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2044पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2044मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4712° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।