31 दिसंबर 2043 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 31 दिसंबर 2043, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 31 दिसंबर 2043 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (15:18 तक), नक्षत्र मूल (11:44 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 13:41 से 14:59 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 17:34
रात 07:13 तक
तिथि
अमावस्या, 15:18 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मूल, 11:44 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2043 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
अमावस्या 15:18 तक
शुक्ल प्रतिपदा 17:21, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 11:44 तक
पूर्वाषाढ़ा 14:16, 1 जन॰ तक
योग
वृद्धि 08:44 तक
ध्रुव 09:14, 1 जन॰ तक
करण
नाग 15:18 तक
किंस्तुघ्न 04:21, 1 जन॰ तक
बव 17:21, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
07:17
चंद्रास्त
17:22
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2100
शक संवत
1965, रुधिरोद्गारी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:24 – 06:18
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
13:41 – 14:59
यमगंड
07:13 – 08:31
गुलिक काल
09:48 – 11:06

31 दिसंबर 2043 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:13 – 08:31शुभ
रोग08:31 – 09:48टालें
उद्वेग09:48 – 11:06टालें
चर11:06 – 12:23सामान्य
लाभ12:23 – 13:41शुभ
अमृत13:41 – 14:59शुभ
काल14:59 – 16:16टालें
शुभ16:16 – 17:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:34 – 19:16शुभ
चर19:16 – 20:59सामान्य
रोग20:59 – 22:41टालें
काल22:41 – 00:24टालें
लाभ00:24 – 02:06शुभ
उद्वेग02:06 – 03:48टालें
शुभ03:48 – 05:31शुभ
अमृत05:31 – 07:13शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1308:05दिन
मंगल08:0508:56दिन
सूर्य08:5609:48दिन
शुक्र09:4810:40दिन
बुध10:4011:32दिन
चंद्र11:3212:23दिन
शनि12:2313:15दिन
गुरु13:1514:07दिन
मंगल14:0714:59दिन
सूर्य14:5915:50दिन
शुक्र15:5016:42दिन
बुध16:4217:34दिन
चंद्र17:3418:42रात
शनि18:4219:51रात
गुरु19:5120:59रात
मंगल20:5922:07रात
सूर्य22:0723:15रात
शुक्र23:1500:24रात
बुध00:2401:32रात
चंद्र01:3202:40रात
शनि02:4003:48रात
गुरु03:4804:57रात
मंगल04:5706:05रात
सूर्य06:0507:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2043पौष अमावस्याअमावस्या
4 जन॰ 2044विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 जन॰ 2044शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 जन॰ 2044प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2044पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2044मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2044संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2044कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2044कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2044प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4717° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।