23 जुलाई 2044 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 23 जुलाई 2044, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 23 जुलाई 2044 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (06:03 तक), नक्षत्र आर्द्रा (18:10 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 19:17 पर है। राहुकाल 09:02 से 10:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 19:17
रात 05:38 तक
तिथि
चतुर्दशी, 02:20 तक
अमावस्या
नक्षत्र
आर्द्रा, 18:10 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जुलाई 2044 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 06:03 तक
कृष्ण चतुर्दशी 02:20, 24 जुल॰ तक
अमावस्या 22:40, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 15:18, 24 जुल॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 12:58 तक
हर्षण 08:50, 24 जुल॰ तक
करण
वणिज 06:03 तक
विष्टि (भद्रा) 16:12 तक
शकुनि 02:20, 24 जुल॰ तक
चतुष्पद 12:29, 24 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
19:17
चंद्रोदय
03:33
चंद्रास्त
18:22
दिनमान
13h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2101
शक संवत
1966, रक्ताक्षी संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
09:02 – 10:45
यमगंड
14:10 – 15:52
गुलिक काल
05:37 – 07:20

23 जुलाई 2044 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:37 – 07:20टालें
शुभ07:20 – 09:02शुभ
रोग09:02 – 10:45टालें
उद्वेग10:45 – 12:27टालें
चर12:27 – 14:10सामान्य
लाभ14:10 – 15:52शुभ
अमृत15:52 – 17:34शुभ
काल17:34 – 19:17टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:17 – 20:34शुभ
उद्वेग20:34 – 21:52टालें
शुभ21:52 – 23:10शुभ
अमृत23:10 – 00:27शुभ
चर00:27 – 01:45सामान्य
रोग01:45 – 03:03टालें
काल03:03 – 04:20टालें
लाभ04:20 – 05:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3706:46दिन
गुरु06:4607:54दिन
मंगल07:5409:02दिन
सूर्य09:0210:11दिन
शुक्र10:1111:19दिन
बुध11:1912:27दिन
चंद्र12:2713:35दिन
शनि13:3514:44दिन
गुरु14:4415:52दिन
मंगल15:5217:00दिन
सूर्य17:0018:08दिन
शुक्र18:0819:17दिन
बुध19:1720:09रात
चंद्र20:0921:00रात
शनि21:0021:52रात
गुरु21:5222:44रात
मंगल22:4423:36रात
सूर्य23:3600:27रात
शुक्र00:2701:19रात
बुध01:1902:11रात
चंद्र02:1103:03रात
शनि03:0303:54रात
गुरु03:5404:46रात
मंगल04:4605:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जुल॰ 2044प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2044श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2044विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 अग॰ 2044शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 अग॰ 2044प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 अग॰ 2044श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2044संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2044कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2044सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2044कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2044प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4795° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।