29 दिसंबर 2045 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2045, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2045 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (14:39 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (16:33 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 07:12 पर और सूर्यास्त 17:33 पर है। राहुकाल 11:05 से 12:23 तक है।

दिन और रात
दिन 07:12 – 17:33
रात 07:13 तक
तिथि
षष्ठी, 14:39 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 16:33 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 दिसंबर 2045 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 14:39 तक
कृष्ण सप्तमी 12:35, 30 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 15:12, 30 दिस॰ तक
योग
आयुष्मान 16:06 तक
सौभाग्य 13:12, 30 दिस॰ तक
करण
वणिज 14:39 तक
विष्टि (भद्रा) 01:35, 30 दिस॰ तक
बव 12:35, 30 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 22:11 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:12
सूर्यास्त
17:33
चंद्रोदय
23:27
चंद्रास्त
11:03
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2102
शक संवत
1967, क्रोधन संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:18
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
11:05 – 12:23
यमगंड
14:58 – 16:15
गुलिक काल
08:30 – 09:48

29 दिसंबर 2045 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:12 – 08:30सामान्य
लाभ08:30 – 09:48शुभ
अमृत09:48 – 11:05शुभ
काल11:05 – 12:23टालें
शुभ12:23 – 13:40शुभ
रोग13:40 – 14:58टालें
उद्वेग14:58 – 16:15टालें
चर16:15 – 17:33सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:33 – 19:15टालें
काल19:15 – 20:58टालें
लाभ20:58 – 22:40शुभ
उद्वेग22:40 – 00:23टालें
शुभ00:23 – 02:05शुभ
अमृत02:05 – 03:48शुभ
चर03:48 – 05:30सामान्य
रोग05:30 – 07:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1208:04दिन
बुध08:0408:56दिन
चंद्र08:5609:48दिन
शनि09:4810:39दिन
गुरु10:3911:31दिन
मंगल11:3112:23दिन
सूर्य12:2313:14दिन
शुक्र13:1414:06दिन
बुध14:0614:58दिन
चंद्र14:5815:50दिन
शनि15:5016:41दिन
गुरु16:4117:33दिन
मंगल17:3318:41रात
सूर्य18:4119:50रात
शुक्र19:5020:58रात
बुध20:5822:06रात
चंद्र22:0623:15रात
शनि23:1500:23रात
गुरु00:2301:31रात
मंगल01:3102:40रात
सूर्य02:4003:48रात
शुक्र03:4804:56रात
बुध04:5606:04रात
चंद्र06:0407:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2045कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2046कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2046प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2046पौष अमावस्याअमावस्या
11 जन॰ 2046विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2046मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2046शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2046प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2046पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2046संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4996° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।