2 नवंबर 2046 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 2 नवंबर 2046, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 2 नवंबर 2046 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (04:45, 3 नव॰ तक), नक्षत्र मूल (23:38 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 17:35 पर है। राहुकाल 10:41 से 12:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 17:35
रात 06:34 तक
तिथि
पंचमी, 04:45 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मूल, 23:38 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 नवंबर 2046 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 04:45, 3 नव॰ तक
शुक्ल षष्ठी 04:37, 4 नव॰ तक
नक्षत्र
मूल 23:38 तक
पूर्वाषाढ़ा 23:56, 3 नव॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 08:17 तक
सुकर्मा 06:22, 3 नव॰ तक
धृति 05:09, 4 नव॰ तक
करण
बव 17:09 तक
बालव 04:45, 3 नव॰ तक
कौलव 16:34, 3 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
17:35
चंद्रोदय
10:38
चंद्रास्त
21:00
दिनमान
11h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2103
शक संवत
1968, अक्षय संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
10:41 – 12:04
यमगंड
14:49 – 16:12
गुलिक काल
07:56 – 09:19

2 नवंबर 2046 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:33 – 07:56सामान्य
लाभ07:56 – 09:19शुभ
अमृत09:19 – 10:41शुभ
काल10:41 – 12:04टालें
शुभ12:04 – 13:27शुभ
रोग13:27 – 14:49टालें
उद्वेग14:49 – 16:12टालें
चर16:12 – 17:35सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:35 – 19:12टालें
काल19:12 – 20:50टालें
लाभ20:50 – 22:27शुभ
उद्वेग22:27 – 00:04टालें
शुभ00:04 – 01:42शुभ
अमृत01:42 – 03:19शुभ
चर03:19 – 04:57सामान्य
रोग04:57 – 06:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3307:28दिन
बुध07:2808:24दिन
चंद्र08:2409:19दिन
शनि09:1910:14दिन
गुरु10:1411:09दिन
मंगल11:0912:04दिन
सूर्य12:0412:59दिन
शुक्र12:5913:54दिन
बुध13:5414:49दिन
चंद्र14:4915:45दिन
शनि15:4516:40दिन
गुरु16:4017:35दिन
मंगल17:3518:40रात
सूर्य18:4019:45रात
शुक्र19:4520:50रात
बुध20:5021:55रात
चंद्र21:5522:59रात
शनि22:5900:04रात
गुरु00:0401:09रात
मंगल01:0902:14रात
सूर्य02:1403:19रात
शुक्र03:1904:24रात
बुध04:2405:29रात
चंद्र05:2906:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 नव॰ 2046शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 नव॰ 2046प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 नव॰ 2046कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2046वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2046संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2046कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2046कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2046प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 नव॰ 2046मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
1 दिस॰ 2046विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5114° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।