5 सितंबर 2047 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 5 सितंबर 2047, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 5 सितंबर 2047 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (15:14 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (21:11 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 13:54 से 15:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:38
रात 06:01 तक
तिथि
प्रतिपदा, 15:14 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 21:11 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 सितंबर 2047 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 15:14 तक
कृष्ण द्वितीया 16:32, 6 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 23:11, 6 सित॰ तक
योग
धृति 11:57 तक
शूलअशुभ 11:54, 6 सित॰ तक
करण
कौलव 15:14 तक
तैतिल 03:50, 6 सित॰ तक
गर 16:32, 6 सित॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 14:45 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
18:56
चंद्रास्त
06:42
दिनमान
12h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2104
शक संवत
1969, प्रभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
13:54 – 15:29
यमगंड
06:01 – 07:35
गुलिक काल
09:10 – 10:45

5 सितंबर 2047 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:01 – 07:35शुभ
रोग07:35 – 09:10टालें
उद्वेग09:10 – 10:45टालें
चर10:45 – 12:19सामान्य
लाभ12:19 – 13:54शुभ
अमृत13:54 – 15:29शुभ
काल15:29 – 17:03टालें
शुभ17:03 – 18:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:38 – 20:03शुभ
चर20:03 – 21:29सामान्य
रोग21:29 – 22:54टालें
काल22:54 – 00:20टालें
लाभ00:20 – 01:45शुभ
उद्वेग01:45 – 03:10टालें
शुभ03:10 – 04:36शुभ
अमृत04:36 – 06:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0107:04दिन
मंगल07:0408:07दिन
सूर्य08:0709:10दिन
शुक्र09:1010:13दिन
बुध10:1311:16दिन
चंद्र11:1612:19दिन
शनि12:1913:22दिन
गुरु13:2214:25दिन
मंगल14:2515:29दिन
सूर्य15:2916:32दिन
शुक्र16:3217:35दिन
बुध17:3518:38दिन
चंद्र18:3819:35रात
शनि19:3520:32रात
गुरु20:3221:29रात
मंगल21:2922:26रात
सूर्य22:2623:23रात
शुक्र23:2300:20रात
बुध00:2001:16रात
चंद्र01:1602:13रात
शनि02:1303:10रात
गुरु03:1004:07रात
मंगल04:0705:04रात
सूर्य05:0406:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 सित॰ 2047संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2047कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 सित॰ 2047कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2047प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 सित॰ 2047कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2047आश्विन अमावस्याअमावस्या
23 सित॰ 2047विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2047शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2047प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2047आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5231° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।