28 अगस्त 2050 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 28 अगस्त 2050, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 28 अगस्त 2050 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (06:50 तक), नक्षत्र मूल (11:52 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 18:47 पर है। राहुकाल 17:10 से 18:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 18:47
रात 05:57 तक
तिथि
एकादशी, 04:45 तक
नक्षत्र
मूल, 11:52 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अगस्त 2050 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल दशमी 06:50 तक
शुक्ल एकादशी 04:45, 29 अग॰ तक
शुक्ल द्वादशी 01:58, 30 अग॰ तक
नक्षत्र
मूल 11:52 तक
पूर्वाषाढ़ा 10:23, 29 अग॰ तक
योग
प्रीति 16:14 तक
आयुष्मान 13:13, 29 अग॰ तक
करण
गर 06:50 तक
वणिज 17:53 तक
विष्टि (भद्रा) 04:45, 29 अग॰ तक
बव 15:26, 29 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
18:47
चंद्रोदय
15:19
चंद्रास्त
01:18
दिनमान
12h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
अधिक भाद्रपद
विक्रम संवत
2107
शक संवत
1972, प्रमोद संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
17:10 – 18:47
यमगंड
12:22 – 13:58
गुलिक काल
15:34 – 17:10

28 अगस्त 2050 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:57 – 07:33टालें
चर07:33 – 09:09सामान्य
लाभ09:09 – 10:45शुभ
अमृत10:45 – 12:22शुभ
काल12:22 – 13:58टालें
शुभ13:58 – 15:34शुभ
रोग15:34 – 17:10टालें
उद्वेग17:10 – 18:47टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:47 – 20:11शुभ
अमृत20:11 – 21:34शुभ
चर21:34 – 22:58सामान्य
रोग22:58 – 00:22टालें
काल00:22 – 01:46टालें
लाभ01:46 – 03:10शुभ
उद्वेग03:10 – 04:33टालें
शुभ04:33 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5707:01दिन
शुक्र07:0108:05दिन
बुध08:0509:09दिन
चंद्र09:0910:13दिन
शनि10:1311:18दिन
गुरु11:1812:22दिन
मंगल12:2213:26दिन
सूर्य13:2614:30दिन
शुक्र14:3015:34दिन
बुध15:3416:38दिन
चंद्र16:3817:43दिन
शनि17:4318:47दिन
गुरु18:4719:43रात
मंगल19:4320:38रात
सूर्य20:3821:34रात
शुक्र21:3422:30रात
बुध22:3023:26रात
चंद्र23:2600:22रात
शनि00:2201:18रात
गुरु01:1802:14रात
मंगल02:1403:10रात
सूर्य03:1004:06रात
शुक्र04:0605:01रात
बुध05:0105:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 अग॰ 2050शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 अग॰ 2050प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 सित॰ 2050अधिक भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
4 सित॰ 2050संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 सित॰ 2050कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 सित॰ 2050कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 सित॰ 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 सित॰ 2050अधिक भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
17 सित॰ 2050कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2050विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5647° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।