12 अप्रैल 2056 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 12 अप्रैल 2056, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 12 अप्रैल 2056 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (00:45, 13 अप्रैल तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (21:28 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 12:22 से 13:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 18:45
रात 05:57 तक
तिथि
त्रयोदशी, 00:45 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 21:28 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अप्रैल 2056 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 00:45, 13 अप्रैल तक
कृष्ण चतुर्दशी 02:58, 14 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 00:12, 14 अप्रैल तक
योग
ब्रह्म 23:37 तक
इंद्र 00:20, 14 अप्रैल तक
करण
गर 11:43 तक
वणिज 00:45, 13 अप्रैल तक
विष्टि (भद्रा) 13:50, 13 अप्रैल तक
चंद्र राशि
कुंभ 14:49 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
04:43
चंद्रास्त
16:32
दिनमान
12h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2113
शक संवत
1978, धाता संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:47 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:22 – 13:57
यमगंड
07:34 – 09:10
गुलिक काल
10:46 – 12:22

12 अप्रैल 2056 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:58 – 07:34शुभ
अमृत07:34 – 09:10शुभ
काल09:10 – 10:46टालें
शुभ10:46 – 12:22शुभ
रोग12:22 – 13:57टालें
उद्वेग13:57 – 15:33टालें
चर15:33 – 17:09सामान्य
लाभ17:09 – 18:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:45 – 20:09टालें
शुभ20:09 – 21:33शुभ
अमृत21:33 – 22:57शुभ
चर22:57 – 00:21सामान्य
रोग00:21 – 01:45टालें
काल01:45 – 03:09टालें
लाभ03:09 – 04:33शुभ
उद्वेग04:33 – 05:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5807:02दिन
चंद्र07:0208:06दिन
शनि08:0609:10दिन
गुरु09:1010:14दिन
मंगल10:1411:18दिन
सूर्य11:1812:22दिन
शुक्र12:2213:25दिन
बुध13:2514:29दिन
चंद्र14:2915:33दिन
शनि15:3316:37दिन
गुरु16:3717:41दिन
मंगल17:4118:45दिन
सूर्य18:4519:41रात
शुक्र19:4120:37रात
बुध20:3721:33रात
चंद्र21:3322:29रात
शनि22:2923:25रात
गुरु23:2500:21रात
मंगल00:2101:17रात
सूर्य01:1702:13रात
शुक्र02:1303:09रात
बुध03:0904:05रात
चंद्र04:0505:01रात
शनि05:0105:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 अप्रैल 2056प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 अप्रैल 2056वैशाख अमावस्याअमावस्या
14 अप्रैल 2056मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
19 अप्रैल 2056विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 अप्रैल 2056शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 अप्रैल 2056प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अप्रैल 2056अधिक वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
3 मई 2056संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मई 2056कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मई 2056कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6433° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।