15 मार्च 2057 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 15 मार्च 2057, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 15 मार्च 2057 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (06:39 तक), नक्षत्र आर्द्रा (10:03 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:30 पर और सूर्यास्त 18:29 पर है। राहुकाल 14:00 से 15:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:30 – 18:29
रात 06:29 तक
तिथि
दशमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 10:03 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 मार्च 2057 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल नवमी 06:39 तक
शुक्ल दशमी 08:24, 16 मार्च तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 12:14, 16 मार्च तक
योग
सौभाग्य 15:22 तक
शोभन 15:29, 16 मार्च तक
करण
कौलव 06:39 तक
तैतिल 19:36 तक
गर 08:24, 16 मार्च तक
चंद्र राशि
मिथुन 05:45, 16 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:30
सूर्यास्त
18:29
चंद्रोदय
13:04
चंद्रास्त
02:29
दिनमान
11h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2113
शक संवत
1978, धाता संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:42
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
14:00 – 15:29
यमगंड
06:30 – 08:00
गुलिक काल
09:30 – 11:00

15 मार्च 2057 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:30 – 08:00शुभ
रोग08:00 – 09:30टालें
उद्वेग09:30 – 11:00टालें
चर11:00 – 12:30सामान्य
लाभ12:30 – 14:00शुभ
अमृत14:00 – 15:29शुभ
काल15:29 – 16:59टालें
शुभ16:59 – 18:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:29 – 19:59शुभ
चर19:59 – 21:29सामान्य
रोग21:29 – 22:59टालें
काल22:59 – 00:29टालें
लाभ00:29 – 01:59शुभ
उद्वेग01:59 – 03:29टालें
शुभ03:29 – 04:59शुभ
अमृत04:59 – 06:29शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3007:30दिन
मंगल07:3008:30दिन
सूर्य08:3009:30दिन
शुक्र09:3010:30दिन
बुध10:3011:30दिन
चंद्र11:3012:30दिन
शनि12:3013:30दिन
गुरु13:3014:30दिन
मंगल14:3015:29दिन
सूर्य15:2916:29दिन
शुक्र16:2917:29दिन
बुध17:2918:29दिन
चंद्र18:2919:29रात
शनि19:2920:29रात
गुरु20:2921:29रात
मंगल21:2922:29रात
सूर्य22:2923:29रात
शुक्र23:2900:29रात
बुध00:2901:29रात
चंद्र01:2902:29रात
शनि02:2903:29रात
गुरु03:2904:29रात
मंगल04:2905:29रात
सूर्य05:2906:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 मार्च 2057शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 मार्च 2057प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 मार्च 2057फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
24 मार्च 2057संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 मार्च 2057कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 मार्च 2057कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 अप्रैल 2057प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 अप्रैल 2057चैत्र अमावस्याअमावस्या
8 अप्रैल 2057विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6562° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।