10 अक्टूबर 2057 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 10 अक्टूबर 2057, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 10 अक्टूबर 2057 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (21:42 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (05:04, 11 अक्टू॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:19 पर और सूर्यास्त 17:56 पर है। राहुकाल 12:07 से 13:35 तक है।

दिन और रात
दिन 06:19 – 17:56
रात 06:19 तक
तिथि
त्रयोदशी, 21:42 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 05:04 तक
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अक्टूबर 2057 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 21:42 तक
शुक्ल चतुर्दशी 20:53, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 05:04, 11 अक्टू॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 05:04, 12 अक्टू॰ तक
योग
गंडअशुभ 06:46 तक
वृद्धि 04:47, 11 अक्टू॰ तक
ध्रुव 03:07, 12 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 10:15 तक
तैतिल 21:42 तक
गर 09:15, 11 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 23:08 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:19
सूर्यास्त
17:56
चंद्रोदय
16:56
चंद्रास्त
03:47
दिनमान
11h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2114
शक संवत
1979, ईश्वर संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:40 – 05:29
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:31 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:07 – 13:35
यमगंड
07:46 – 09:13
गुलिक काल
10:40 – 12:07

10 अक्टूबर 2057 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:19 – 07:46शुभ
अमृत07:46 – 09:13शुभ
काल09:13 – 10:40टालें
शुभ10:40 – 12:07शुभ
रोग12:07 – 13:35टालें
उद्वेग13:35 – 15:02टालें
चर15:02 – 16:29सामान्य
लाभ16:29 – 17:56शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:56 – 19:29टालें
शुभ19:29 – 21:02शुभ
अमृत21:02 – 22:35शुभ
चर22:35 – 00:08सामान्य
रोग00:08 – 01:41टालें
काल01:41 – 03:13टालें
लाभ03:13 – 04:46शुभ
उद्वेग04:46 – 06:19टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:1907:17दिन
चंद्र07:1708:15दिन
शनि08:1509:13दिन
गुरु09:1310:11दिन
मंगल10:1111:09दिन
सूर्य11:0912:07दिन
शुक्र12:0713:06दिन
बुध13:0614:04दिन
चंद्र14:0415:02दिन
शनि15:0216:00दिन
गुरु16:0016:58दिन
मंगल16:5817:56दिन
सूर्य17:5618:58रात
शुक्र18:5820:00रात
बुध20:0021:02रात
चंद्र21:0222:04रात
शनि22:0423:06रात
गुरु23:0600:08रात
मंगल00:0801:10रात
सूर्य01:1002:12रात
शुक्र02:1203:13रात
बुध03:1304:15रात
चंद्र04:1505:17रात
शनि05:1706:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2057प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अक्टू॰ 2057आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
16 अक्टू॰ 2057संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2057तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टू॰ 2057कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अक्टू॰ 2057कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अक्टू॰ 2057प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 अक्टू॰ 2057कार्तिक अमावस्याअमावस्या
31 अक्टू॰ 2057विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 नव॰ 2057शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6642° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।