14 अप्रैल 2058 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 14 अप्रैल 2058, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 14 अप्रैल 2058 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (19:06 तक), नक्षत्र मूल (21:03 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 17:10 से 18:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 18:46
रात 05:55 तक
तिथि
षष्ठी, 19:06 तक
सप्तमी
नक्षत्र
मूल, 21:03 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अप्रैल 2058 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 19:06 तक
कृष्ण सप्तमी 17:01, 15 अप्रैल तक
नक्षत्र
मूल 21:03 तक
पूर्वाषाढ़ा 19:42, 15 अप्रैल तक
योग
परिघअशुभ 20:37 तक
शिव 17:48, 15 अप्रैल तक
करण
गर 08:07 तक
वणिज 19:06 तक
विष्टि (भद्रा) 06:04, 15 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
09:58
दिनमान
12h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2115
शक संवत
1980, बहुधान्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
17:10 – 18:46
यमगंड
12:21 – 13:57
गुलिक काल
15:34 – 17:10

14 अप्रैल 2058 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:56 – 07:33टालें
चर07:33 – 09:09सामान्य
लाभ09:09 – 10:45शुभ
अमृत10:45 – 12:21शुभ
काल12:21 – 13:57टालें
शुभ13:57 – 15:34शुभ
रोग15:34 – 17:10टालें
उद्वेग17:10 – 18:46टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:46 – 20:10शुभ
अमृत20:10 – 21:33शुभ
चर21:33 – 22:57सामान्य
रोग22:57 – 00:21टालें
काल00:21 – 01:44टालें
लाभ01:44 – 03:08शुभ
उद्वेग03:08 – 04:32टालें
शुभ04:32 – 05:55शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5607:00दिन
शुक्र07:0008:05दिन
बुध08:0509:09दिन
चंद्र09:0910:13दिन
शनि10:1311:17दिन
गुरु11:1712:21दिन
मंगल12:2113:25दिन
सूर्य13:2514:29दिन
शुक्र14:2915:34दिन
बुध15:3416:38दिन
चंद्र16:3817:42दिन
शनि17:4218:46दिन
गुरु18:4619:42रात
मंगल19:4220:37रात
सूर्य20:3721:33रात
शुक्र21:3322:29रात
बुध22:2923:25रात
चंद्र23:2500:21रात
शनि00:2101:16रात
गुरु01:1602:12रात
मंगल02:1203:08रात
सूर्य03:0804:04रात
शुक्र04:0405:00रात
बुध05:0005:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अप्रैल 2058मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
16 अप्रैल 2058कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
19 अप्रैल 2058कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 अप्रैल 2058प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 अप्रैल 2058वैशाख अमावस्याअमावस्या
26 अप्रैल 2058विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 मई 2058शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 मई 2058प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 मई 2058वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
12 मई 2058संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6713° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।