8 जनवरी 2060 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 8 जनवरी 2060, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 8 जनवरी 2060 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (11:42 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (05:04, 9 जन॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 07:14 पर और सूर्यास्त 17:40 पर है। राहुकाल 13:45 से 15:04 तक है।

दिन और रात
दिन 07:14 – 17:40
रात 07:15 तक
तिथि
पंचमी, 11:42 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 05:04 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 जनवरी 2060 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 11:42 तक
शुक्ल षष्ठी 09:27, 9 जन॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 03:37, 10 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 12:43 तक
वरीयान 09:39, 9 जन॰ तक
करण
बालव 11:42 तक
कौलव 22:34 तक
तैतिल 09:27, 9 जन॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 23:27 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:14
सूर्यास्त
17:40
चंद्रोदय
10:51
चंद्रास्त
22:40
दिनमान
10h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2116
शक संवत
1981, प्रमाथी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
13:45 – 15:04
यमगंड
07:14 – 08:33
गुलिक काल
09:51 – 11:09

8 जनवरी 2060 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:14 – 08:33शुभ
रोग08:33 – 09:51टालें
उद्वेग09:51 – 11:09टालें
चर11:09 – 12:27सामान्य
लाभ12:27 – 13:45शुभ
अमृत13:45 – 15:04शुभ
काल15:04 – 16:22टालें
शुभ16:22 – 17:40शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:40 – 19:22शुभ
चर19:22 – 21:04सामान्य
रोग21:04 – 22:45टालें
काल22:45 – 00:27टालें
लाभ00:27 – 02:09शुभ
उद्वेग02:09 – 03:51टालें
शुभ03:51 – 05:33शुभ
अमृत05:33 – 07:15शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1408:07दिन
मंगल08:0708:59दिन
सूर्य08:5909:51दिन
शुक्र09:5110:43दिन
बुध10:4311:35दिन
चंद्र11:3512:27दिन
शनि12:2713:19दिन
गुरु13:1914:11दिन
मंगल14:1115:04दिन
सूर्य15:0415:56दिन
शुक्र15:5616:48दिन
बुध16:4817:40दिन
चंद्र17:4018:48रात
शनि18:4819:56रात
गुरु19:5621:04रात
मंगल21:0422:11रात
सूर्य22:1123:19रात
शुक्र23:1900:27रात
बुध00:2701:35रात
चंद्र01:3502:43रात
शनि02:4303:51रात
गुरु03:5104:59रात
मंगल04:5906:07रात
सूर्य06:0707:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 जन॰ 2060शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 जन॰ 2060प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 जन॰ 2060मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2060पौष पूर्णिमापूर्णिमा
21 जन॰ 2060संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 जन॰ 2060कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2060कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2060प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2060माघ अमावस्याअमावस्या
5 फ़र॰ 2060विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6955° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।