5 फ़रवरी 2060 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2060, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2060 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (22:57 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (12:05 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 13:57 से 15:19 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 18:03
रात 07:06 तक
तिथि
चतुर्थी, 22:57 तक
पंचमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 12:05 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 फ़रवरी 2060 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 22:57 तक
शुक्ल पंचमी 20:16, 6 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 09:59, 6 फ़र॰ तक
योग
शिव 14:52 तक
सिद्ध 11:22, 6 फ़र॰ तक
करण
वणिज 12:24 तक
विष्टि (भद्रा) 22:57 तक
बव 09:34, 6 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
09:24
चंद्रास्त
21:34
दिनमान
10h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2116
शक संवत
1981, प्रमाथी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
13:57 – 15:19
यमगंड
07:07 – 08:29
गुलिक काल
09:51 – 11:13

5 फ़रवरी 2060 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:07 – 08:29शुभ
रोग08:29 – 09:51टालें
उद्वेग09:51 – 11:13टालें
चर11:13 – 12:35सामान्य
लाभ12:35 – 13:57शुभ
अमृत13:57 – 15:19शुभ
काल15:19 – 16:41टालें
शुभ16:41 – 18:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:03 – 19:41शुभ
चर19:41 – 21:19सामान्य
रोग21:19 – 22:56टालें
काल22:56 – 00:34टालें
लाभ00:34 – 02:12शुभ
उद्वेग02:12 – 03:50टालें
शुभ03:50 – 05:28शुभ
अमृत05:28 – 07:06शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:0708:01दिन
मंगल08:0108:56दिन
सूर्य08:5609:51दिन
शुक्र09:5110:45दिन
बुध10:4511:40दिन
चंद्र11:4012:35दिन
शनि12:3513:29दिन
गुरु13:2914:24दिन
मंगल14:2415:19दिन
सूर्य15:1916:13दिन
शुक्र16:1317:08दिन
बुध17:0818:03दिन
चंद्र18:0319:08रात
शनि19:0820:13रात
गुरु20:1321:19रात
मंगल21:1922:24रात
सूर्य22:2423:29रात
शुक्र23:2900:34रात
बुध00:3401:40रात
चंद्र01:4002:45रात
शनि02:4503:50रात
गुरु03:5004:55रात
मंगल04:5506:01रात
सूर्य06:0107:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 फ़र॰ 2060विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 फ़र॰ 2060शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 फ़र॰ 2060कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2060प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 फ़र॰ 2060माघ पूर्णिमापूर्णिमा
20 फ़र॰ 2060संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 फ़र॰ 2060कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 फ़र॰ 2060कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 फ़र॰ 2060प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 मार्च 2060फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6966° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।