3 अगस्त 2062 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 3 अगस्त 2062, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 3 अगस्त 2062 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (13:38 तक), नक्षत्र आर्द्रा (09:32 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:43 पर और सूर्यास्त 19:10 पर है। राहुकाल 14:08 से 15:48 तक है।

दिन और रात
दिन 05:43 – 19:10
रात 05:44 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:38 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
आर्द्रा, 09:32 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अगस्त 2062 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 13:38 तक
कृष्ण चतुर्दशी 09:53, 4 अग॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 06:38, 4 अग॰ तक
योग
हर्षण 09:54 तक
वज्रअशुभ 05:45, 4 अग॰ तक
करण
वणिज 13:38 तक
विष्टि (भद्रा) 23:46 तक
शकुनि 09:53, 4 अग॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 01:22, 4 अग॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:43
सूर्यास्त
19:10
चंद्रोदय
03:16
चंद्रास्त
18:03
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2119
शक संवत
1984, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
14:08 – 15:48
यमगंड
05:43 – 07:24
गुलिक काल
09:05 – 10:46

3 अगस्त 2062 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:43 – 07:24शुभ
रोग07:24 – 09:05टालें
उद्वेग09:05 – 10:46टालें
चर10:46 – 12:27सामान्य
लाभ12:27 – 14:08शुभ
अमृत14:08 – 15:48शुभ
काल15:48 – 17:29टालें
शुभ17:29 – 19:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:10 – 20:29शुभ
चर20:29 – 21:49सामान्य
रोग21:49 – 23:08टालें
काल23:08 – 00:27टालें
लाभ00:27 – 01:46शुभ
उद्वेग01:46 – 03:06टालें
शुभ03:06 – 04:25शुभ
अमृत04:25 – 05:44शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4306:51दिन
मंगल06:5107:58दिन
सूर्य07:5809:05दिन
शुक्र09:0510:12दिन
बुध10:1211:20दिन
चंद्र11:2012:27दिन
शनि12:2713:34दिन
गुरु13:3414:41दिन
मंगल14:4115:48दिन
सूर्य15:4816:56दिन
शुक्र16:5618:03दिन
बुध18:0319:10दिन
चंद्र19:1020:03रात
शनि20:0320:56रात
गुरु20:5621:49रात
मंगल21:4922:41रात
सूर्य22:4123:34रात
शुक्र23:3400:27रात
बुध00:2701:20रात
चंद्र01:2002:13रात
शनि02:1303:06रात
गुरु03:0603:58रात
मंगल03:5804:51रात
सूर्य04:5105:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अग॰ 2062प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 अग॰ 2062श्रावण अमावस्याअमावस्या
8 अग॰ 2062विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 अग॰ 2062शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अग॰ 2062प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2062सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2062श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
24 अग॰ 2062संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 अग॰ 2062कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 अग॰ 2062कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
1 सित॰ 2062प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7314° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।