8 अक्टूबर 2075 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2075, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2075 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (06:01, 9 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (07:30 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:17 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 15:03 से 16:31 तक है।

दिन और रात
दिन 06:17 – 17:59
रात 06:18 तक
तिथि
चतुर्दशी, 06:01 तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अक्टूबर 2075 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 06:01, 9 अक्टू॰ तक
अमावस्या 05:13, 10 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 07:54, 9 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 13:11 तक
ब्रह्म 11:47, 9 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 18:12 तक
शकुनि 06:01, 9 अक्टू॰ तक
चतुष्पद 17:41, 9 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 13:40 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:17
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
04:26
चंद्रास्त
17:20
दिनमान
11h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2132
शक संवत
1997, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:39 – 05:28
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
15:03 – 16:31
यमगंड
09:13 – 10:40
गुलिक काल
12:08 – 13:36

8 अक्टूबर 2075 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:17 – 07:45टालें
उद्वेग07:45 – 09:13टालें
चर09:13 – 10:40सामान्य
लाभ10:40 – 12:08शुभ
अमृत12:08 – 13:36शुभ
काल13:36 – 15:03टालें
शुभ15:03 – 16:31शुभ
रोग16:31 – 17:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:59 – 19:31टालें
लाभ19:31 – 21:04शुभ
उद्वेग21:04 – 22:36टालें
शुभ22:36 – 00:08शुभ
अमृत00:08 – 01:41शुभ
चर01:41 – 03:13सामान्य
रोग03:13 – 04:45टालें
काल04:45 – 06:18टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1707:16दिन
सूर्य07:1608:14दिन
शुक्र08:1409:13दिन
बुध09:1310:11दिन
चंद्र10:1111:10दिन
शनि11:1012:08दिन
गुरु12:0813:06दिन
मंगल13:0614:05दिन
सूर्य14:0515:03दिन
शुक्र15:0316:02दिन
बुध16:0217:00दिन
चंद्र17:0017:59दिन
शनि17:5919:00रात
गुरु19:0020:02रात
मंगल20:0221:04रात
सूर्य21:0422:05रात
शुक्र22:0523:07रात
बुध23:0700:08रात
चंद्र00:0801:10रात
शनि01:1002:11रात
गुरु02:1103:13रात
मंगल03:1304:15रात
सूर्य04:1505:16रात
शुक्र05:1606:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अक्टू॰ 2075आश्विन अमावस्याअमावस्या
13 अक्टू॰ 2075विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
18 अक्टू॰ 2075तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2075शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 अक्टू॰ 2075प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 अक्टू॰ 2075आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
27 अक्टू॰ 2075संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 नव॰ 2075कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 नव॰ 2075कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 नव॰ 2075प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.9156° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।