11 सितंबर 2077 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 11 सितंबर 2077, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 सितंबर 2077 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (02:26, 12 सित॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (17:14 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 18:30 पर है। राहुकाल 09:10 से 10:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 18:30
रात 06:04 तक
तिथि
दशमी, 02:26 तक
एकादशी
नक्षत्र
आर्द्रा, 17:14 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 सितंबर 2077 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण दशमी 02:26, 12 सित॰ तक
कृष्ण एकादशी 03:32, 13 सित॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 18:46, 12 सित॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 21:07 तक
वरीयान 20:53, 12 सित॰ तक
करण
वणिज 14:04 तक
विष्टि (भद्रा) 02:26, 12 सित॰ तक
बव 14:55, 12 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
18:30
चंद्रोदय
00:24
चंद्रास्त
14:59
दिनमान
12h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2134
शक संवत
1999, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
09:10 – 10:44
यमगंड
13:50 – 15:23
गुलिक काल
06:04 – 07:37

11 सितंबर 2077 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:04 – 07:37टालें
शुभ07:37 – 09:10शुभ
रोग09:10 – 10:44टालें
उद्वेग10:44 – 12:17टालें
चर12:17 – 13:50सामान्य
लाभ13:50 – 15:23शुभ
अमृत15:23 – 16:57शुभ
काल16:57 – 18:30टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:30 – 19:57शुभ
उद्वेग19:57 – 21:24टालें
शुभ21:24 – 22:50शुभ
अमृत22:50 – 00:17शुभ
चर00:17 – 01:44सामान्य
रोग01:44 – 03:11टालें
काल03:11 – 04:38टालें
लाभ04:38 – 06:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0407:06दिन
गुरु07:0608:08दिन
मंगल08:0809:10दिन
सूर्य09:1010:13दिन
शुक्र10:1311:15दिन
बुध11:1512:17दिन
चंद्र12:1713:19दिन
शनि13:1914:21दिन
गुरु14:2115:23दिन
मंगल15:2316:26दिन
सूर्य16:2617:28दिन
शुक्र17:2818:30दिन
बुध18:3019:28रात
चंद्र19:2820:26रात
शनि20:2621:24रात
गुरु21:2422:21रात
मंगल22:2123:19रात
सूर्य23:1900:17रात
शुक्र00:1701:15रात
बुध01:1502:13रात
चंद्र02:1303:11रात
शनि03:1104:09रात
गुरु04:0905:07रात
मंगल05:0706:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 सित॰ 2077कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 सित॰ 2077प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 सित॰ 2077आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 सित॰ 2077कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
21 सित॰ 2077विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 सित॰ 2077शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 सित॰ 2077प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अक्टू॰ 2077अधिक आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
5 अक्टू॰ 2077संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 अक्टू॰ 2077कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.9425° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।