14 जनवरी 2086 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 14 जनवरी 2086, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 14 जनवरी 2086 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (19:34 तक), नक्षत्र मूल (12:05 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:14 पर और सूर्यास्त 17:45 पर है। राहुकाल 08:33 से 09:52 तक है।

दिन और रात
दिन 07:14 – 17:45
रात 07:14 तक
तिथि
चतुर्दशी, 19:34 तक
अमावस्या
नक्षत्र
मूल, 12:05 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जनवरी 2086 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 19:34 तक
अमावस्या 16:55, 15 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 12:05 तक
पूर्वाषाढ़ा 10:17, 15 जन॰ तक
योग
ध्रुव 07:40 तक
व्याघातअशुभ 04:30, 15 जन॰ तक
हर्षण 00:57, 16 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:43 तक
शकुनि 19:34 तक
चतुष्पद 06:18, 15 जन॰ तक
नाग 16:55, 15 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:14
सूर्यास्त
17:45
चंद्रोदय
05:58
चंद्रास्त
16:41
दिनमान
10h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2142
शक संवत
2007, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
08:33 – 09:52
यमगंड
11:11 – 12:30
गुलिक काल
13:49 – 15:07

14 जनवरी 2086 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:14 – 08:33शुभ
काल08:33 – 09:52टालें
शुभ09:52 – 11:11शुभ
रोग11:11 – 12:30टालें
उद्वेग12:30 – 13:49टालें
चर13:49 – 15:07सामान्य
लाभ15:07 – 16:26शुभ
अमृत16:26 – 17:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:45 – 19:26सामान्य
रोग19:26 – 21:07टालें
काल21:07 – 22:49टालें
लाभ22:49 – 00:30शुभ
उद्वेग00:30 – 02:11टालें
शुभ02:11 – 03:52शुभ
अमृत03:52 – 05:33शुभ
चर05:33 – 07:14सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1408:07दिन
शनि08:0708:59दिन
गुरु08:5909:52दिन
मंगल09:5210:45दिन
सूर्य10:4511:37दिन
शुक्र11:3712:30दिन
बुध12:3013:22दिन
चंद्र13:2214:15दिन
शनि14:1515:07दिन
गुरु15:0716:00दिन
मंगल16:0016:53दिन
सूर्य16:5317:45दिन
शुक्र17:4518:53रात
बुध18:5320:00रात
चंद्र20:0021:07रात
शनि21:0722:15रात
गुरु22:1523:22रात
मंगल23:2200:30रात
सूर्य00:3001:37रात
शुक्र01:3702:45रात
बुध02:4503:52रात
चंद्र03:5204:59रात
शनि04:5906:07रात
गुरु06:0707:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जन॰ 2086माघ अमावस्याअमावस्या
15 जन॰ 2086मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2086विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जन॰ 2086शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जन॰ 2086प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जन॰ 2086माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2086संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 फ़र॰ 2086कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 फ़र॰ 2086कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 फ़र॰ 2086प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.0591° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।