24 अक्टूबर 2000 को पटना का पंचांग

मंगलवार, 24 अक्टूबर 2000, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 24 अक्टूबर 2000 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (16:56 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (08:36 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 17:14 पर है। राहुकाल 14:23 से 15:48 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 17:14
रात 05:53 तक
तिथि
द्वादशी, 16:56 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 अक्टूबर 2000 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 16:56 तक
कृष्ण त्रयोदशी 15:26, 25 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 07:42, 25 अक्टू॰ तक
योग
ब्रह्म 07:50 तक
इंद्र 05:22, 25 अक्टू॰ तक
वैधृतिअशुभ 03:07, 26 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 16:56 तक
गर 04:09, 25 अक्टू॰ तक
वणिज 15:26, 25 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 14:22 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
17:14
चंद्रोदय
02:41
चंद्रास्त
15:35
दिनमान
11h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2057
शक संवत
1922, विक्रम संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
14:23 – 15:48
यमगंड
08:43 – 10:08
गुलिक काल
11:33 – 12:58

24 अक्टूबर 2000 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:52 – 07:17टालें
उद्वेग07:17 – 08:43टालें
चर08:43 – 10:08सामान्य
लाभ10:08 – 11:33शुभ
अमृत11:33 – 12:58शुभ
काल12:58 – 14:23टालें
शुभ14:23 – 15:48शुभ
रोग15:48 – 17:14टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:14 – 18:49टालें
लाभ18:49 – 20:23शुभ
उद्वेग20:23 – 21:58टालें
शुभ21:58 – 23:33शुभ
अमृत23:33 – 01:08शुभ
चर01:08 – 02:43सामान्य
रोग02:43 – 04:18टालें
काल04:18 – 05:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5206:49दिन
सूर्य06:4907:46दिन
शुक्र07:4608:43दिन
बुध08:4309:39दिन
चंद्र09:3910:36दिन
शनि10:3611:33दिन
गुरु11:3312:30दिन
मंगल12:3013:27दिन
सूर्य13:2714:23दिन
शुक्र14:2315:20दिन
बुध15:2016:17दिन
चंद्र16:1717:14दिन
शनि17:1418:17रात
गुरु18:1719:20रात
मंगल19:2020:23रात
सूर्य20:2321:27रात
शुक्र21:2722:30रात
बुध22:3023:33रात
चंद्र23:3300:37रात
शनि00:3701:40रात
गुरु01:4002:43रात
मंगल02:4303:46रात
सूर्य03:4604:50रात
शुक्र04:5005:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 अक्टू॰ 2000प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अक्टू॰ 2000कार्तिक अमावस्याअमावस्या
31 अक्टू॰ 2000विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 नव॰ 2000शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 नव॰ 2000प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 नव॰ 2000कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
15 नव॰ 2000संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2000वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2000कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 नव॰ 2000कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8684° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।