18 नवंबर 2001 को पटना का पंचांग

रविवार, 18 नवंबर 2001, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 18 नवंबर 2001 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (09:39 तक), नक्षत्र मूल (19:36 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 15:38 से 16:59 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 16:59
रात 06:09 तक
तिथि
तृतीया, 09:39 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
मूल, 19:36 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 नवंबर 2001 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 09:39 तक
शुक्ल चतुर्थी 10:12, 19 नव॰ तक
नक्षत्र
मूल 19:36 तक
पूर्वाषाढ़ा 21:00, 19 नव॰ तक
योग
धृति 21:11 तक
शूलअशुभ 20:43, 19 नव॰ तक
करण
गर 09:39 तक
वणिज 21:50 तक
विष्टि (भद्रा) 10:12, 19 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
08:56
चंद्रास्त
19:40
दिनमान
10h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
15:38 – 16:59
यमगंड
11:34 – 12:55
गुलिक काल
14:17 – 15:38

18 नवंबर 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:08 – 07:30टालें
चर07:30 – 08:51सामान्य
लाभ08:51 – 10:13शुभ
अमृत10:13 – 11:34शुभ
काल11:34 – 12:55टालें
शुभ12:55 – 14:17शुभ
रोग14:17 – 15:38टालें
उद्वेग15:38 – 16:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ16:59 – 18:38शुभ
अमृत18:38 – 20:17शुभ
चर20:17 – 21:56सामान्य
रोग21:56 – 23:34टालें
काल23:34 – 01:13टालें
लाभ01:13 – 02:52शुभ
उद्वेग02:52 – 04:30टालें
शुभ04:30 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0807:03दिन
शुक्र07:0307:57दिन
बुध07:5708:51दिन
चंद्र08:5109:45दिन
शनि09:4510:40दिन
गुरु10:4011:34दिन
मंगल11:3412:28दिन
सूर्य12:2813:22दिन
शुक्र13:2214:17दिन
बुध14:1715:11दिन
चंद्र15:1116:05दिन
शनि16:0516:59दिन
गुरु16:5918:05रात
मंगल18:0519:11रात
सूर्य19:1120:17रात
शुक्र20:1721:23रात
बुध21:2322:29रात
चंद्र22:2923:34रात
शनि23:3400:40रात
गुरु00:4001:46रात
मंगल01:4602:52रात
सूर्य02:5203:58रात
शुक्र03:5805:03रात
बुध05:0306:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 नव॰ 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 नव॰ 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 नव॰ 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 नव॰ 2001कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
4 दिस॰ 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 दिस॰ 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 दिस॰ 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 दिस॰ 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 दिस॰ 2001मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 दिस॰ 2001धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8833° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।