14 नवंबर 2002 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 14 नवंबर 2002, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 14 नवंबर 2002 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (18:59 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (05:31, 15 नव॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 17:01 पर है। राहुकाल 12:55 से 14:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 17:01
रात 06:06 तक
तिथि
दशमी, 18:59 तक
एकादशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 05:31 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 नवंबर 2002 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल दशमी 18:59 तक
शुक्ल एकादशी 21:28, 15 नव॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 05:31, 15 नव॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 08:30, 16 नव॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 13:38 तक
हर्षण 14:26, 15 नव॰ तक
करण
गर 18:59 तक
वणिज 08:12, 15 नव॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 22:47 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
17:01
चंद्रोदय
14:03
चंद्रास्त
01:01
दिनमान
10h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
12:55 – 14:17
यमगंड
06:05 – 07:27
गुलिक काल
08:49 – 10:11

14 नवंबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:05 – 07:27शुभ
रोग07:27 – 08:49टालें
उद्वेग08:49 – 10:11टालें
चर10:11 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 12:55शुभ
अमृत12:55 – 14:17शुभ
काल14:17 – 15:39टालें
शुभ15:39 – 17:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:01 – 18:39शुभ
चर18:39 – 20:17सामान्य
रोग20:17 – 21:55टालें
काल21:55 – 23:34टालें
लाभ23:34 – 01:12शुभ
उद्वेग01:12 – 02:50टालें
शुभ02:50 – 04:28शुभ
अमृत04:28 – 06:06शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0507:00दिन
मंगल07:0007:55दिन
सूर्य07:5508:49दिन
शुक्र08:4909:44दिन
बुध09:4410:39दिन
चंद्र10:3911:33दिन
शनि11:3312:28दिन
गुरु12:2813:22दिन
मंगल13:2214:17दिन
सूर्य14:1715:12दिन
शुक्र15:1216:06दिन
बुध16:0617:01दिन
चंद्र17:0118:06रात
शनि18:0619:12रात
गुरु19:1220:17रात
मंगल20:1721:23रात
सूर्य21:2322:28रात
शुक्र22:2823:34रात
बुध23:3400:39रात
चंद्र00:3901:44रात
शनि01:4402:50रात
गुरु02:5003:55रात
मंगल03:5505:01रात
सूर्य05:0106:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 नव॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2002वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 नव॰ 2002कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
24 नव॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 नव॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 नव॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 दिस॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 दिस॰ 2002मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
7 दिस॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8971° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।