8 नवंबर 2004 को पटना का पंचांग

सोमवार, 8 नवंबर 2004, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 8 नवंबर 2004 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (02:42, 9 नव॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (11:35 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 17:03 पर है। राहुकाल 07:24 से 08:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 17:03
रात 06:02 तक
तिथि
एकादशी, 02:42 तक
द्वादशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 11:35 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 नवंबर 2004 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 02:42, 9 नव॰ तक
कृष्ण द्वादशी 02:00, 10 नव॰ तक
नक्षत्र
योग
इंद्र 07:42 तक
वैधृतिअशुभ 06:28, 9 नव॰ तक
करण
बव 14:47 तक
बालव 02:42, 9 नव॰ तक
कौलव 14:27, 9 नव॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 17:45 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
17:03
चंद्रोदय
01:34
चंद्रास्त
14:25
दिनमान
11h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2061
शक संवत
1926, तारण संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
07:24 – 08:47
यमगंड
10:10 – 11:33
गुलिक काल
12:55 – 14:18

8 नवंबर 2004 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:02 – 07:24शुभ
काल07:24 – 08:47टालें
शुभ08:47 – 10:10शुभ
रोग10:10 – 11:33टालें
उद्वेग11:33 – 12:55टालें
चर12:55 – 14:18सामान्य
लाभ14:18 – 15:41शुभ
अमृत15:41 – 17:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:03 – 18:41सामान्य
रोग18:41 – 20:18टालें
काल20:18 – 21:56टालें
लाभ21:56 – 23:33शुभ
उद्वेग23:33 – 01:10टालें
शुभ01:10 – 02:48शुभ
अमृत02:48 – 04:25शुभ
चर04:25 – 06:02सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0206:57दिन
शनि06:5707:52दिन
गुरु07:5208:47दिन
मंगल08:4709:42दिन
सूर्य09:4210:37दिन
शुक्र10:3711:33दिन
बुध11:3312:28दिन
चंद्र12:2813:23दिन
शनि13:2314:18दिन
गुरु14:1815:13दिन
मंगल15:1316:08दिन
सूर्य16:0817:03दिन
शुक्र17:0318:08रात
बुध18:0819:13रात
चंद्र19:1320:18रात
शनि20:1821:23रात
गुरु21:2322:28रात
मंगल22:2823:33रात
सूर्य23:3300:38रात
शुक्र00:3801:43रात
बुध01:4302:48रात
चंद्र02:4803:53रात
शनि03:5304:57रात
गुरु04:5706:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 नव॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 नव॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 नव॰ 2004कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2004वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
22 नव॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 नव॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 नव॰ 2004कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
1 दिस॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 दिस॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9248° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।