19 अक्टूबर 2011 को पटना का पंचांग

बुधवार, 19 अक्टूबर 2011, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 19 अक्टूबर 2011 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (20:59 तक), नक्षत्र आर्द्रा (09:58 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 17:18 पर है। राहुकाल 11:34 से 13:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 17:18
रात 05:50 तक
तिथि
सप्तमी, 20:59 तक
अष्टमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 09:58 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अक्टूबर 2011 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 20:59 तक
कृष्ण अष्टमी 20:49, 20 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 10:46, 20 अक्टू॰ तक
योग
शिव 19:07 तक
सिद्ध 17:56, 20 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:46 तक
बव 20:59 तक
बालव 09:00, 20 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 04:38, 20 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
17:18
चंद्रोदय
22:49
चंद्रास्त
11:43
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2068
शक संवत
1933, खर संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:57 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:34 – 13:00
यमगंड
07:15 – 08:42
गुलिक काल
10:08 – 11:34

19 अक्टूबर 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:49 – 07:15शुभ
अमृत07:15 – 08:42शुभ
काल08:42 – 10:08टालें
शुभ10:08 – 11:34शुभ
रोग11:34 – 13:00टालें
उद्वेग13:00 – 14:26टालें
चर14:26 – 15:52सामान्य
लाभ15:52 – 17:18शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:18 – 18:52टालें
शुभ18:52 – 20:26शुभ
अमृत20:26 – 22:00शुभ
चर22:00 – 23:34सामान्य
रोग23:34 – 01:08टालें
काल01:08 – 02:42टालें
लाभ02:42 – 04:16शुभ
उद्वेग04:16 – 05:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4906:47दिन
चंद्र06:4707:44दिन
शनि07:4408:42दिन
गुरु08:4209:39दिन
मंगल09:3910:36दिन
सूर्य10:3611:34दिन
शुक्र11:3412:31दिन
बुध12:3113:29दिन
चंद्र13:2914:26दिन
शनि14:2615:24दिन
गुरु15:2416:21दिन
मंगल16:2117:18दिन
सूर्य17:1818:21रात
शुक्र18:2119:24रात
बुध19:2420:26रात
चंद्र20:2621:29रात
शनि21:2922:31रात
गुरु22:3123:34रात
मंगल23:3400:37रात
सूर्य00:3701:39रात
शुक्र01:3902:42रात
बुध02:4203:45रात
चंद्र03:4504:47रात
शनि04:4705:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 अक्टू॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 अक्टू॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 अक्टू॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2011कार्तिक अमावस्याअमावस्या
30 अक्टू॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 नव॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 नव॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 नव॰ 2011कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
15 नव॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2011वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0218° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।