3 नवंबर 2014 को पटना का पंचांग

सोमवार, 3 नवंबर 2014, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 3 नवंबर 2014 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (12:16 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (20:01 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 07:22 से 08:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 17:07
रात 05:59 तक
तिथि
एकादशी, 12:16 तक
द्वादशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 20:01 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2014 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 12:16 तक
शुक्ल द्वादशी 09:54, 4 नव॰ तक
नक्षत्र
योग
व्याघातअशुभ 00:41, 4 नव॰ तक
हर्षण 21:37, 4 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:16 तक
बव 23:04 तक
बालव 09:54, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 14:26 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
14:35
चंद्रास्त
02:02
दिनमान
11h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2071
शक संवत
1936, जय संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
07:22 – 08:45
यमगंड
10:09 – 11:32
गुलिक काल
12:56 – 14:20

3 नवंबर 2014 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:58 – 07:22शुभ
काल07:22 – 08:45टालें
शुभ08:45 – 10:09शुभ
रोग10:09 – 11:32टालें
उद्वेग11:32 – 12:56टालें
चर12:56 – 14:20सामान्य
लाभ14:20 – 15:43शुभ
अमृत15:43 – 17:07शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:07 – 18:43सामान्य
रोग18:43 – 20:20टालें
काल20:20 – 21:56टालें
लाभ21:56 – 23:33शुभ
उद्वेग23:33 – 01:09टालें
शुभ01:09 – 02:46शुभ
अमृत02:46 – 04:22शुभ
चर04:22 – 05:59सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5806:54दिन
शनि06:5407:50दिन
गुरु07:5008:45दिन
मंगल08:4509:41दिन
सूर्य09:4110:37दिन
शुक्र10:3711:32दिन
बुध11:3212:28दिन
चंद्र12:2813:24दिन
शनि13:2414:20दिन
गुरु14:2015:15दिन
मंगल15:1516:11दिन
सूर्य16:1117:07दिन
शुक्र17:0718:11रात
बुध18:1119:15रात
चंद्र19:1520:20रात
शनि20:2021:24रात
गुरु21:2422:28रात
मंगल22:2823:33रात
सूर्य23:3300:37रात
शुक्र00:3701:41रात
बुध01:4102:46रात
चंद्र02:4603:50रात
शनि03:5004:54रात
गुरु04:5405:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 नव॰ 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 नव॰ 2014प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 नव॰ 2014कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
10 नव॰ 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 नव॰ 2014कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2014वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2014कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 नव॰ 2014प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 नव॰ 2014मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
26 नव॰ 2014विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 दिस॰ 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0643° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।