10 नवंबर 2016 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 10 नवंबर 2016, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 10 नवंबर 2016 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (11:21 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (02:55, 11 नव॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 17:02 पर है। राहुकाल 12:55 से 14:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 17:02
रात 06:04 तक
तिथि
दशमी, 11:21 तक
एकादशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 02:55 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 नवंबर 2016 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल दशमी 11:21 तक
शुक्ल एकादशी 09:12, 11 नव॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 02:55, 11 नव॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 01:00, 12 नव॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 19:18 तक
हर्षण 16:10, 11 नव॰ तक
करण
गर 11:21 तक
वणिज 22:22 तक
विष्टि (भद्रा) 09:12, 11 नव॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 21:18 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
17:02
चंद्रोदय
14:03
चंद्रास्त
01:12
दिनमान
10h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
12:55 – 14:18
यमगंड
06:03 – 07:25
गुलिक काल
08:48 – 10:10

10 नवंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:03 – 07:25शुभ
रोग07:25 – 08:48टालें
उद्वेग08:48 – 10:10टालें
चर10:10 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 12:55शुभ
अमृत12:55 – 14:18शुभ
काल14:18 – 15:40टालें
शुभ15:40 – 17:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:02 – 18:40शुभ
चर18:40 – 20:18सामान्य
रोग20:18 – 21:55टालें
काल21:55 – 23:33टालें
लाभ23:33 – 01:11शुभ
उद्वेग01:11 – 02:48टालें
शुभ02:48 – 04:26शुभ
अमृत04:26 – 06:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0306:58दिन
मंगल06:5807:53दिन
सूर्य07:5308:48दिन
शुक्र08:4809:43दिन
बुध09:4310:38दिन
चंद्र10:3811:33दिन
शनि11:3312:28दिन
गुरु12:2813:23दिन
मंगल13:2314:18दिन
सूर्य14:1815:13दिन
शुक्र15:1316:07दिन
बुध16:0717:02दिन
चंद्र17:0218:08रात
शनि18:0819:13रात
गुरु19:1320:18रात
मंगल20:1821:23रात
सूर्य21:2322:28रात
शुक्र22:2823:33रात
बुध23:3300:38रात
चंद्र00:3801:43रात
शनि01:4302:48रात
गुरु02:4803:54रात
मंगल03:5404:59रात
सूर्य04:5906:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 नव॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2016कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2016वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 नव॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 नव॰ 2016मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
3 दिस॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0926° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।