12 अगस्त 2025 को पटना का पंचांग

मंगलवार, 12 अगस्त 2025, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 12 अगस्त 2025 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (08:41 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (11:52 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 15:10 से 16:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 18:27
रात 05:21 तक
तिथि
तृतीया, 08:41 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 11:52 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अगस्त 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 08:41 तक
कृष्ण चतुर्थी 06:36, 13 अग॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 10:32, 13 अग॰ तक
योग
सुकर्मा 18:53 तक
धृति 16:05, 13 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:41 तक
बव 19:40 तक
बालव 06:36, 13 अग॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 06:10 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
20:28
चंद्रास्त
08:04
दिनमान
13h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:20

अशुभ समय

राहुकाल
15:10 – 16:49
यमगंड
08:37 – 10:16
गुलिक काल
11:54 – 13:32

12 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:21 – 06:59टालें
उद्वेग06:59 – 08:37टालें
चर08:37 – 10:16सामान्य
लाभ10:16 – 11:54शुभ
अमृत11:54 – 13:32शुभ
काल13:32 – 15:10टालें
शुभ15:10 – 16:49शुभ
रोग16:49 – 18:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:27 – 19:49टालें
लाभ19:49 – 21:10शुभ
उद्वेग21:10 – 22:32टालें
शुभ22:32 – 23:54शुभ
अमृत23:54 – 01:16शुभ
चर01:16 – 02:38सामान्य
रोग02:38 – 03:59टालें
काल03:59 – 05:21टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2106:26दिन
सूर्य06:2607:32दिन
शुक्र07:3208:37दिन
बुध08:3709:43दिन
चंद्र09:4310:48दिन
शनि10:4811:54दिन
गुरु11:5412:59दिन
मंगल12:5914:05दिन
सूर्य14:0515:10दिन
शुक्र15:1016:16दिन
बुध16:1617:21दिन
चंद्र17:2118:27दिन
शनि18:2719:21रात
गुरु19:2120:16रात
मंगल20:1621:10रात
सूर्य21:1022:05रात
शुक्र22:0523:00रात
बुध23:0023:54रात
चंद्र23:5400:49रात
शनि00:4901:43रात
गुरु01:4302:38रात
मंगल02:3803:32रात
सूर्य03:3204:27रात
शुक्र04:2705:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2148° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।