6 जुलाई 2026 को पटना का पंचांग

सोमवार, 6 जुलाई 2026, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 6 जुलाई 2026 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (13:47 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (16:07 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:03 पर और सूर्यास्त 18:44 पर है। राहुकाल 06:46 से 08:28 तक है।

दिन और रात
दिन 05:03 – 18:44
रात 05:04 तक
तिथि
षष्ठी, 13:47 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 16:07 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 जुलाई 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 13:47 तक
कृष्ण सप्तमी 13:25, 7 जुल॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 16:24, 7 जुल॰ तक
योग
सौभाग्य 15:51 तक
शोभन 14:31, 7 जुल॰ तक
करण
वणिज 13:47 तक
विष्टि (भद्रा) 01:41, 7 जुल॰ तक
बव 13:25, 7 जुल॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 09:57 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:03
सूर्यास्त
18:44
चंद्रोदय
22:45
चंद्रास्त
10:28
दिनमान
13h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:41 – 04:22
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
06:46 – 08:28
यमगंड
10:11 – 11:54
गुलिक काल
13:36 – 15:19

6 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:03 – 06:46शुभ
काल06:46 – 08:28टालें
शुभ08:28 – 10:11शुभ
रोग10:11 – 11:54टालें
उद्वेग11:54 – 13:36टालें
चर13:36 – 15:19सामान्य
लाभ15:19 – 17:01शुभ
अमृत17:01 – 18:44शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:44 – 20:01सामान्य
रोग20:01 – 21:19टालें
काल21:19 – 22:36टालें
लाभ22:36 – 23:54शुभ
उद्वेग23:54 – 01:11टालें
शुभ01:11 – 02:29शुभ
अमृत02:29 – 03:46शुभ
चर03:46 – 05:04सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:0306:12दिन
शनि06:1207:20दिन
गुरु07:2008:28दिन
मंगल08:2809:37दिन
सूर्य09:3710:45दिन
शुक्र10:4511:54दिन
बुध11:5413:02दिन
चंद्र13:0214:10दिन
शनि14:1015:19दिन
गुरु15:1916:27दिन
मंगल16:2717:36दिन
सूर्य17:3618:44दिन
शुक्र18:4419:36रात
बुध19:3620:27रात
चंद्र20:2721:19रात
शनि21:1922:11रात
गुरु22:1123:02रात
मंगल23:0223:54रात
सूर्य23:5400:45रात
शुक्र00:4501:37रात
बुध01:3702:29रात
चंद्र02:2903:20रात
शनि03:2004:12रात
गुरु04:1205:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जुल॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2274° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।