27 जुलाई 2026 को पटना का पंचांग

सोमवार, 27 जुलाई 2026, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 27 जुलाई 2026 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (16:15 तक), नक्षत्र मूल (10:28 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:13 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 06:54 से 08:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:13 – 18:38
रात 05:14 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:15 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मूल, 10:28 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 जुलाई 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 16:15 तक
शुक्ल चतुर्दशी 18:19, 28 जुल॰ तक
नक्षत्र
मूल 10:28 तक
पूर्वाषाढ़ा 13:11, 28 जुल॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 22:55 तक
विष्कंभअशुभ 23:33, 28 जुल॰ तक
करण
तैतिल 16:15 तक
गर 05:19, 28 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:13
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
17:14
चंद्रास्त
02:49
दिनमान
13h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:48 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
06:54 – 08:34
यमगंड
10:15 – 11:55
गुलिक काल
13:36 – 15:17

27 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:13 – 06:54शुभ
काल06:54 – 08:34टालें
शुभ08:34 – 10:15शुभ
रोग10:15 – 11:55टालें
उद्वेग11:55 – 13:36टालें
चर13:36 – 15:17सामान्य
लाभ15:17 – 16:57शुभ
अमृत16:57 – 18:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:38 – 19:57सामान्य
रोग19:57 – 21:17टालें
काल21:17 – 22:36टालें
लाभ22:36 – 23:56शुभ
उद्वेग23:56 – 01:15टालें
शुभ01:15 – 02:35शुभ
अमृत02:35 – 03:54शुभ
चर03:54 – 05:14सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1306:20दिन
शनि06:2007:27दिन
गुरु07:2708:34दिन
मंगल08:3409:41दिन
सूर्य09:4110:48दिन
शुक्र10:4811:55दिन
बुध11:5513:02दिन
चंद्र13:0214:09दिन
शनि14:0915:17दिन
गुरु15:1716:24दिन
मंगल16:2417:31दिन
सूर्य17:3118:38दिन
शुक्र18:3819:31रात
बुध19:3120:24रात
चंद्र20:2421:17रात
शनि21:1722:10रात
गुरु22:1023:03रात
मंगल23:0323:56रात
सूर्य23:5600:49रात
शुक्र00:4901:42रात
बुध01:4202:35रात
चंद्र02:3503:28रात
शनि03:2804:21रात
गुरु04:2105:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2282° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।