4 जुलाई 2027 को पटना का पंचांग

रविवार, 4 जुलाई 2027, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 4 जुलाई 2027 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (08:32 तक), नक्षत्र आर्द्रा (12:10 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:02 पर और सूर्यास्त 18:44 पर है। राहुकाल 17:01 से 18:44 तक है।

दिन और रात
दिन 05:02 – 18:44
रात 05:03 तक
तिथि
अमावस्या, 08:32 तक
प्रतिपदा, 04:51 तक
नक्षत्र
आर्द्रा, 12:10 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 जुलाई 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
अमावस्या 08:32 तक
शुक्ल प्रतिपदा 04:51, 5 जुल॰ तक
शुक्ल द्वितीया 01:14, 6 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 09:19, 5 जुल॰ तक
योग
ध्रुव 15:22 तक
व्याघातअशुभ 11:16, 5 जुल॰ तक
करण
नाग 08:32 तक
किंस्तुघ्न 18:42 तक
बव 04:51, 5 जुल॰ तक
बालव 15:01, 5 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 04:02, 5 जुल॰ तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:02
सूर्यास्त
18:44
चंद्रोदय
04:52
चंद्रास्त
19:10
दिनमान
13h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:40 – 04:21
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
17:01 – 18:44
यमगंड
11:53 – 13:36
गुलिक काल
15:19 – 17:01

4 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:02 – 06:45टालें
चर06:45 – 08:28सामान्य
लाभ08:28 – 10:11शुभ
अमृत10:11 – 11:53शुभ
काल11:53 – 13:36टालें
शुभ13:36 – 15:19शुभ
रोग15:19 – 17:01टालें
उद्वेग17:01 – 18:44टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:44 – 20:01शुभ
अमृत20:01 – 21:19शुभ
चर21:19 – 22:36सामान्य
रोग22:36 – 23:53टालें
काल23:53 – 01:11टालें
लाभ01:11 – 02:28शुभ
उद्वेग02:28 – 03:46टालें
शुभ03:46 – 05:03शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:0206:11दिन
शुक्र06:1107:19दिन
बुध07:1908:28दिन
चंद्र08:2809:36दिन
शनि09:3610:45दिन
गुरु10:4511:53दिन
मंगल11:5313:02दिन
सूर्य13:0214:10दिन
शुक्र14:1015:19दिन
बुध15:1916:27दिन
चंद्र16:2717:36दिन
शनि17:3618:44दिन
गुरु18:4419:36रात
मंगल19:3620:27रात
सूर्य20:2721:19रात
शुक्र21:1922:10रात
बुध22:1023:02रात
चंद्र23:0223:53रात
शनि23:5300:45रात
गुरु00:4501:37रात
मंगल01:3702:28रात
सूर्य02:2803:20रात
शुक्र03:2004:11रात
बुध04:1105:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जुल॰ 2027आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
7 जुल॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2413° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।